सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 350, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें३४० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
६--लर्त द्रेष्काण के विभाग में सिर स्थान में राहु मंगल या शनि होवे तो सिर स्थान में अग्नि, शस्त्र व काष्ठ से भय हो ( शंभु० ) ।
७--९,७,८,२ भाव में सूर्य से युक्त द्वितीयेश हो मंगल से दुष्ट हो या पाप ग्रह मंगल उपरोक्त राशि में होकर सूर्य से दृष्ट हो तो विस्फोट (ब्रण) या अग्नि का भय हो ( स० चि० ) ।
८--तीसरे भाव में सूर्य या मंगल हो तो हड्डी ट्टे, विष का भय, अग्नि दाह आदि का भय हो।
यदि शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो उस स्थान के चर्म में भिन्नता कर देता है (शंभु.) ।
९--पंचम मंगल हो तो अग्नि व शस्त्र की पीड़ा हो संतान वराबर मरती रहे, मनुष्य दुःखित रहे ( शंभु० ) ।
१०--नवमेश षष्ठ में हो, षष्ठेश से दृष्ट हो, और षष्ठेश के साथ शनि व मंगल हो तो चोर व अग्नि से पीड़ित रहे ( स० चिं० )। ११--१ ओर ६ के स्वामी राहु युक्त या केन्द्रमै हो तो सिर ददं भय, सिर में चक्कर आने की शिकायत या चोर अग्नि या दाँत का भय हो ( स० चि० )1
१२--छग्नेश शनि से युक्त या दृष्ट हो तो अग्नि शस्त्र का या गिरने से सिर में ब्रण हो ( स० चि० )।
पत्थर की चोट शस्त्र आदि से पीड़ित १--नवम में सूर्य चन्द्र हो तो काष्ठ से पत्थर से तथा शस्त्र से पीड़ा हो (शंभु० )।
२-चतुर्थेश सूर्यं और शनि युक्त हो मंगल से दृष्ट हो, शुभ दृष्ट न हो तो पत्थर से चोट लगने का योग है ( स० चिं० ) 1
३--लग्नेश मंगल लग्न में पाप युक्त या दृष्ट हो तो पत्थर की चोट या खंड ` आदि से सिर में ब्रण हो (स० चि० )। ४ व्यय भाव बुध से युक्त हो तो शत्रु से व पत्थर काष्ट, लोह, श्वूग वाले जीव या पवन आदि से वाधा हो ( जा० सं० )1 चोर ठग या राज भय १--लग्नेश शनि से युक्त य! दृष्ट हो तो निश्चय ठग चोर व राजा से भय हो ।
२--छग्न में राहु शनि मंगल युक्त हो । ३-- लग्नेश अष्टम में राहु या केतु युक्त हो । ४-लग्न में राहु त्रिकोण में गुलिक और अष्टम में मंगल केतु युक्त या मंगल शनि युक्त हो या इसमें वृहज्जीव हो या अष्टमेश स्थित राश्यंशेश राहु युक्त हो तो ठग चोर या राजा से भय हो । (वृहज्जीव-शनि मंगल युत राहु को कहते हैं) ( स० चि० ) । ५-- द्वितीयेश के साथ पाप युवत सूर्य हो तो राजा के कोप का भय हो (सर्णच) ७- लग्नेश पाप युक्त हो रून में राहु हो तो ठग चोरों से भय हो।