सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 349, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंनीरोगता : ३२९
५--सप्तमेश लग्नेश युक्त चतुर्थं में हो और दशमेश से दुष्ट हो तो कुआँ तांछाब
जदी आदि में गिरे ।
६---चतुर्थेश का नवांश स्वामी सप्तमेश या चतुर्थेश युक्त या दृष्ट हो तो भी उपरोक्त फल हो ( स० चिं० ) ।
७--कन्या राशि में सूर्य चन्द्र दोनों हों ओर पाप ग्रह से दुष्ट हों तो जल में
डूबने से मरण हो ( जा० सं० ) ।
८--कर्क पर शनि और मकर पर चंद्र हो तो उपरोक्त फल ( जा० स० )।
६--चतुरस्थ ग्रह नीच राशि में या अस्त हो तो कूप ताळाब आदि में गिरे
( जा० पा०) 1
१०--चतुर्थेश नीच का, अस्त, चतुर्थ भाव में शत्रुगृढी जल राशि का हो
चतुर्थेश हीन बल हो तो कुआँ के किनारे जल समूह में गिरे ( स० चि० ) ।
१ --तृतीयेश गुरु युक्त लग्न में हो ओर जल राश का लग्न हो तो जल से
भय हो ( स० चि० ) ।
१२--धन भाव में चन्द्र हो तो जळ से भय हो ( शंभु० ) ।
१३--छमग्नेश और षष्ठेश चन्द्र के साथ हो तो जल से भय हो ( स० चि० ) ।
१४ -व्यय में चन्द्रमा से युक्त शनि व राहु या केतु हो तो जळ से पीड़ा हो
( जा० सं० ) ।
१५--शनि मंगल राहु से युक्त हो या शनि चतुर्थ भाव में हो तो जल से भय
हो (स० चि० ) ,
१६--लग्न में चन्द्र पाप राशि का पाप ग्रह युक्त या दुष्ट हो तो जछ से भय हो
(शंभु० )।
१७--जलचर लग्न हो तो जल भें डूबने का भय हो ( जा० पारि० ) ।
१८--चतुर्थ में शनि राहु हो तो वाँध व जछ से व ऊपर से गिरने से व अपने
शरीर से मृत्यु ( जा० सं० ) । ;
१९--यदि शनि अष्टम में क्षीण चन्द्र युक्त हो तो पिशाच पीड़ा हो और पानी
में बहने का भय हो ।
२०--६ या ८ भाव में सूर्य हो और उससे १२वें चन्द्र हो तो ५ और ९ वर्ष में
जल भय हो ( वृ० पा० ) ।
अग्नि भय या विष आदि भय १--छाभ में मंगळ सूर्य हो तो वह अग्नि विष या
अस्त्र चोट से युक्त या पीड़ित हो ( शंभु? ) ।
२--मंगल नवम हो तो अग्नि व विष से पीड़ित हो ( शंभु० )।
३--व्यय में सूर्य व मंगल हो तो अग्नि पीड़ा हो ।
४---गुरु षष्ठ भाव में, शनि अष्टम हो सूयं कक में हो जित पर मंगल की दृष्टि
हो तो अग्नि भय हो ( जा० सं० ) ।
५--लगन में पाप ग्रह पाप राशि का पाप ग्रह से दृष्ट हो तो अग्नि से दग्ध हो (शंभु)।