भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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३५४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

७--कोई ग्रह नीच में हो उसके उच्च राशि का स्वामी या वह जिस राशि में

बैठा हो उत्तका स्वामी ठग्न से केन्द्र में हो तो वह धामिक चक्रवर्ती राजा हो

स० चिं० ू

2071 में नीच ग्रह पड़ा हो उस राशि का स्वामी उच्च राशि का स्वामी हो

और केन्द्र या त्रिकोण में हो तो धर्मवान्‌ चक्रवर्ती राजा हो ( छ० चं० ) ।

९--जन्म समय गुरु नीच में और नीच राशि का स्वामी या ग्रह के उच्च राशि

का स्वामी चन्द्र से या लग्न से केन्द्र में हो तो चक्रवर्ती राजा हो ( फल० ) ।

१०--जो ग्रह नीच में हो परन्तु उस राशि से दृष्ट हो तो प्रसिद्ध और पृथ्वी

पति बना देता है ( फछ० ) ।

११--अकेला ग्रह नीच का हो और उसकी किरणें तेज हों और गति में वक्री हो

यह ६,८,१२ घर छोड़कर और कहीं शुभ स्थान में हो तो राजा के तुल्य हो, यदि

२-३ ऐसे ग्रह हों तो राजा हो । यदि ऐसे कोई ग्रह न हों और शुभ राशि या अंश में

हो तो राज चिह्न सूचक जैप्ते मुकुट छत्र चौरी आदि से परिपूर्ण हो ( फछ० )।

१२--जन्म में केन्द्रवर्ती ग्रह नीच राशि में हो, उस राशि का स्वामी जो ग्रह है

यदि उसका उच्च राशि का स्वामी केन्द्र में हो तो राज कुल का उत्पन्न राजा होता

है ( जा० भ० ) ।

१३--नीच ग्रह जिस घर में हो उस राशि का स्वामी या ग्रह जो उसी स्थान में

उच्च का हो यदि चन्द्र से केन्द्र में हो तो नीच भंग राज योग होता है । वह रानी

और राजा का आदरपात्र होता है ( स० चिं० ) ।

१४--नीच गत का अंश स्वामी ग्रह केन्द्र त्रिकोण में होवे लग्न में चर राशि हो

लग्नेश चर राशि या चरांशक में हो तो राजा हो ( स० चिं० ) ।

१५--६.८,१२ भाव के स्वामी भी नीच में होकर छग्न को देखते हों तो राज￾योग होता है ( वृ० पा० ) । १६--३,६,८,११ भाव में नीच का ग्रह हो लग्न को देखता हो तो राजयोग होता है ( वृ पा० ) ।

१७--जब २, ३ या ४ ग्रह नीच में होकर शुभ षष्ठ्यंश में हों और सूर्य उच्च नवांश में हो तो राजा के बराबर हो ( स० चिं० ) ।

१८--एक भी शुभ ग्रह केन्द्र में उच्च का होकर बैठा हो जिस पर बलवान्‌ सूर्य

की दृष्टि हो और पंचम भाव में गुरु हो तो वह मनुष्यों का नायक हो (जा० भ०) । अन्यमत--उच्च का एक भी शुभ ग्रह तथा केन्द्रमै बली सूयं पर पंचम स्वामी

` गुदकी दृष्टि हो तो नायक हो ।

१९--शुभ ग्रह उच्च के केन्द्र में हों तो राज लक्ष्मी का स्वामी, यदि पाप ग्रह

उचव के केन्द्र में हों तो क्यो के घर में राजा हो ( ल० च॑० ) ।

२०--२-३ ग्रह उच्च में हों चंद्र कक राशि का हो और छून पूर्ण बली हो तो

सवंत्र पूज्य राजा हो ( जा० पारि० ) ।