भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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राजयोग : १५५

२१--मूछ त्रिकोण या मित्र राशि में या वक्री ग्रह किसी भाव में शेष ग्रह उच्च

राशि में हों परन्तु नीचांशक में न हों तो राजा के तुल्य हो ( स० चिं० ) |

२२--उच्च या मूल त्रिकोण के ३-४ ग्रह बलवान्‌ हों तो राजवंशी राजा हो

ठ 21301 हो। ग्रह यदि बलहीन हों तो राजा नहीं होता धनवान्‌ होता है

(वृ जा० ||

२३--तीन या अधिक ग्रह उच्च या स्वगृही हों तो प्रसिद्ध राजा हो (फल०) ।

२४--४ या ५ ग्रह स्वोच्च यां मूल त्रिकोण में हों तो हीन कुल का भी राजा

हो ( वृ० पा० )।

२५--५ या अधिक ग्रह उच्च या मूल त्रिकोण में हों तो अन्य वंशी भी राजा

हो परन्तु ग्रह बलहीन हों तो राजा के तुल्य हो ( वृ० जा० ) ।

८ २६--५ या अधिक ग्रह उच्च के या स्वगृही केन्द्र में हों तो चक्रवर्ती राजा हो

बु० पा० ) ।

२७--तीन या अधिक ग्रह उच्च स्वगृही या मूल त्रिकोण में हों तो राजवंशी

राजा हो अन्य राज कारवार में श्रेष्ठ अधिकारी हो ( प्रो० मो० ) ।

२८--नवम भाव में सब शुभ या अशुभ ग्रह उच्च में हों ओर शुभग्रह से दृष्ठ

हों तो शत्रु को जीतने वाला सुन्दर कांति वाला राजा हो ( जा० सं० ) ।

२९--वृष लग्न हो उच्च स्वगृही या मूल त्रिकोण में हो परन्तु नीय नवांश में

न हो तो राजा हो ( स० चिं० )।

३०--उच्छ या स्वक्षेत्री ३-४ ग्रह केन्द्र में हों अस्त न हों और कोई दुर्योग न

हो तो राज कुल में उत्पन्न मनुष्य राजा हो ( फल०)।

३१--३ या अधिक ग्रह स्वक्षेत्री या मूल त्रिकोण में हों तो राजवंश में उत्पन्न

राजा हो ( जैमिनी ) ।

३२--२३ ग्रह स्वगुही हों तो मंत्री हो ( मा० ) ।

३३--सभी ग्रह स्वक्षेत्री हों तो राजा के तुल्य हो ( स० चिं० ) ।

३४--वृष लग्न में चन्द्र हो और ७ ग्रह स्वगृही हों तो राजा के बराबर हो

{ स० चिं० ) । ८

३४--उच्च के ग्रह राजयोग करते हैं परन्तु वे नीचांशक क्रूर आदि षष्ठ्यंश में

न हों। उच्च के ग्रह पाप नवांश और पाप षष्ठ्यंश में हों तो राजशक्ति को नष्ट

कर नीचा करते हैं. साधारण फल देते हैं। इसी से राशि की अपेक्षा अंश अधिक

बलवान्‌ हे । इसी से बलवान्‌ ग्रह शुम षष्ठयंश में अधिक राजयोग करते हैं।

३४--ज्योतिष चक्र के पूर्वाढ में उच्च के एवं बलवान्‌ ग्रह हों तो जीवन के पूर्व

भाग में राजा के समान शक्ति और धन देते हैं। यदि पश्‍चिमादध में हों तो जीवन के

अन्तिम भाग में शक्ति और सफलता देते हैं। यदि दोनों भाग में हों तो जीवन भर

शक्ति और उन्नति देते हैं । खसन से ७ भाव तक पूर्वार्द पश्चात्‌ शेष पश्चिमार्द है या जीवन को ३ भाग में