भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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३५६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

बाँटो तो जिस खंड में अधिक उच्च के बलवान्‌ ग्रह या शुभ ग्रह हों वहाँ शक्ति और

सफलता मिले पाप ग्रह एवं बलहीन ग्रहों से दुःख शोक हानि मिले ।

(१) खंड--१२,१,२, रे भाव, (२) खंड-४,५,६,७ भाव, (३) खंड-८,९,१०,११

भाव समझना । न

३७---लरन या अन्य भाव से क्रम से ही जिसके सब ग्रह हों इध एकावली योग

में महाराजा होता है ( ० चं० )।

३८--लग्न से २,३,४,५,६ और १० इन्हीं घरों में सब ग्रह हों तो छोटे कुल का

भी राजा हो ( मान० ) ।

३९--दशम भाव से तीसरे भाव तक सब शुभ ग्रह हों तो राजा के समान हो

(स० चि० ) ।

४०--१२,११,१,२,३,१० इन भावों में शुभ ग्रह हों तो राजा के समान हो

( जा० पारि० ) ।

४१--५,६,८, ९,१२ स्थान में शुभ और ग्रह हों तो वह राजाओं में पूज्य हो पर: दुष्ट हो ( छ० चं० ) । ४२--५,६,९,१२ घर में शुभ और पाप ग्रह हों तो राज मान्य, शत्रु का नाशक

हो परन्तु साथ में झगड़े भी बहुत लगे रहें ( मान० ) ।

४३--१,५,६,७,११ राशि में सब ग्रह हों तो राजा हो ( जा० पारि० ) ।

४४---१,२,७,१२ राशियों में सब ग्रह हों तो भूमण्डल का स्वामी हो (जा.पारि.)

४५--२,३,५,६,९,११,१२ राशि में सब ग्रह हों तो सेना हाथी युक्त राजा हो

( जार पारि० ) ।

४६--१,२,३,१०,११,१२ राशियों में सब ग्रह हों तो हाथी आदि से युक्त विख्यात

राजा हो ( मान० )। *

४७--२,९,१२ राशि में सब ग्रह केन्द्र में हों तो राजा हो ( जा० पारि० )।

४८--१,२,३,४,५,७,९ भाव में सब ग्रह हों इन प्रत्येक भाव में ग्रह हो तो

घामिक हो ( जा० पारि० ) ।

४९--१,२,४,५,७,९,१०,१९ थर में गुरु शुक्र स्वगृही या उच्च में हों तो धन युक्त राज्यमान्य हो ( जैमिनि ) ।

५०--चन्द्र से ३,६,१०,११ घर में सब ग्रह हों तो धन वाहन युक्त राज्यमाभ्य हो ( जा० भ० ) ।

५१--छग्न या चन्द्र वर्गोत्तम हो, चन्द्र को छोड़कर ४,७.१० स्थान में सब ग्रह

हों तो राजा हो ( जा० पारि० ) । 4

५२--१,३,५,९ भाव में कहीं भी ४ ग्रह एकत्र हों यदि वह दासी पुत्र भी हो तो

भी राजा के समान हो ( मान० ) ।

५३--१,२,३,५,९,११ भाव में कहीं पाप या शुभ ४ ग्रह हों तो राजयोग हो ( जैमिनि० ) ।