भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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राजयोग : ३५७

५४--३,४,५ भाव में सब ग्रह हों तो बहुत घन हो और देश का स्वामी हो

{ जा० पारि० ) ।

५५--४,५,९ भाव में सब ग्रह हों उसके पहिले हुए बाळक मर जायें पीछे के

जिये, दूसरी स्त्री से युक्त हो और जातक विख्यात दानी दीर्घायु राजा हो ( मान. ) ।

५६--२,६,८,१२ भाव में सब ग्रह हों तो सिंहासन प्राप्त हो (लू. चं, )।

५७--१,५,७,९ भाव में सब ग्रह हों यह हंस योग है अपने वंश का पालन कर्ता

हो ( ल. चं.)॥।

भ्ू८ध--राशि चक्र में ६ घर ग्रह रहित हों तो वह राजा हो या राजा के समान

हो अंत में स्वर्ग जाता है ।

केन्द्र त्रिकोण आदि के योग

५९--एक भी ग्रह जो अस्तंगत न हो स्वराशि या मित्र राशि में हो षडवगं

शुद्धि हो और केन्द्र त्रिकोण में हो तो चक्रवर्ती राजा हो ( शंभु ) ।

६०--पूर्वोक्त रीति से २ ग्रह षड वर्ग में शुद्धि होकर बैठ हों तो उस राजा का

आधिपत्य द्वीपान्तरों में पृथ्वी तक होता है ( जा. भ. ) शंभु ।

६१--३ ग्रह उच्च और मूल त्रिकोण के अधिकार से हीन होकर षड़वर्ग में शुद्ध

होकर बैठे हों तो वह राजा का मंत्री हो ( जा. भ. ) ।

६२--पूर्वोक्त रीति से ४ ग्रह हों तो राजा होता है ( जा. भ. ) 1

६३--यदि ५, ६ ग्रह षड़वर्ग में शुद्ध बैठे हों वह सावंभोम राजा हो (जा. भ.)

६४-न्रिकोण लक्ष्मी का स्थान है, केन्द्र विष्णु का स्थान है इन दोनों स्वामियों के

सम्बन्ध होने से चक्रवर्ती राजा हो ( म० परा० ) ।

६५-चारों केन्द्र में शुभ ग्रह हों और पाप ग्रह ६ या १२ भाव में हो तो संसार

अ विख्यात ध्वजा और छत्र से शोभित राजा होता है ( छ० चं० ) ।

६६-केन्द्र गत ग्रह पाप राशियों में होवे या सोम्य, राशियों में पाप ग्रह होवे तो

-वह शबर और चोरों का राजा होता है और धनवान्‌ होता है ( वृ० जा० ) ।

६७-शुभ ग्रह सम्बन्धी राशि वलवान्‌ होकर केन्द्र में हो और पाप ग्रह पाप

राशियों में हो तो भी उपरोक्त फल हो ( जा० सं० ) 1

६८-जिसका एक भी ग्रहं पंचम नवांश में हो वह भी राजा होता है (जा०भ०)।

६९-जन्म में कोई एक ग्रह पंचवर्गी शुद्ध हो तो राजा हो (शंभु०) ।

७०-सब शुभ ग्रह॒ केन्द्र त्रिकोण में हों पाप ग्रह ३, ६, ११ में हों तो राजा हो

{( बु० पा० )। ७१ ४254 भी पूर्ण बली ग्रह केन्द्र त्रिकोण में हो तो दीर्घायु निरोग हो सब दोष

'दूर हों ( मान० ) ।. |

७२-सब शुभ ग्रह शुभ क्षेत्र में होकर केन्द्र में हों तो सदा शुभ कर्म करने वाल ।

हो ( मान० ) । ७३-शुस ग्रह की राशि में बलिष्ठ ग्रह केन्द्र में हों इसी प्रकार पाप ग्रह की राशि