सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 38, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें३० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
नवम में बुध शनि-धनी प्रिय जनों से युक्त, रोगी चतुर, विषम स्वभाव, बेर
कर्ता, बहु मार्गी ।
नवम में गुरु शुक्र-भाग्यवान्, सुन्दर ऐश्वर्य, राजा, बड़ी आयु, सुन्दर भाग्य
सम्पन्न, अनेक सुख युक्त ।
नवम में गुर शनि-धन रत्न युक्त, पूज्य स्वजन हीन, व्याधि युक्त ।
नवम में शुक्र शनि-यशवान्, पृथ्वी पति, व्याधि युक्त, शीलवान् बहुमित्र
(जा० सं०)
(१०) लग्न से दशम में २ ग्रह योग
दशम में सूर्य चन्द्र--सुन्दर शरीर, शत्रु पर जीत, दयाहीन, सेनापति, दुःशील
युक्त, राजसी स्वभाव ।
दशम में सूर्य मंगल--चाकरी कर्ता, निष्फल कार्य, प्रधान, राजा का सेवक,
नित्य उद्विग्न चित्त ।
दशम में सूर्य बुघ--हाथी घोड़ा पृथ्वी का स्वामी, विख्यात । यदि नौच का हो
तो ऐसा नहीं होगा ।
दशम में सूये गुर--नीच कुल में भी जन्म लेकर राजा हो, कीर्ति, सौख्य, सम्मान
और धन से युक्त ।
दशम में सूर्ये शुक्र राजनीति शास्त्र में चतुर, मित्र धन वाहन युक्त, बहुत कार्यों
का आरम्भ करने वाळा ।
दशम में सूय शनि--परदेशगामी, चाकरी करने वाला, जो कुछ धन राजा से
प्राप्त करता है उसे किसी समय चोर चुरा ले जाता है।
दशम में चंद्र मंगल--हाथी घोड़ा खजाना सम्पदा बुद्धि से युक्त, पराक्रमी ।
दशम में चंद्र बुध--विख्यात, मानयुक्त, घनी, राजा, मंत्री, अवस्था के अन्त
भाग में दुःखी, बन्धु से हीन ।
दशम में चन्द्र गरु विद्वान् दानकर्ता, मान धन कीति से युक्त, समृद्ध लम्बी
भुजा, सबके पूजने योग्य ।
दशम में चन्द्र शुक्र-मंत्री, विख्यात क्षमायुक्त, धन विभव से युक्त ।
दशम में चन्द्र शनि-विख्यात, जीते हुए शत्रु वाला, राजा, २ स्त्री ।
दशम में मंगळ बुघ-शूरवीर बुद्धिमान्, तेजस्वी राजा से सत्कार प्राप्त, क्रूर,
सेनापति, धीर ।
दशम में मंगल गुरु-बहुत से परिवार और धन वाला, राजा, कीतिमान् और
कमं समर्थं ।
दशम में मंगळ शुक्र-शास्त्र विद्या में निपुण, माछा, वस्त्र, विद्या अर्थ बुद्धि से
युक्त, राजमन्त्री, स्त्री के समान शरीर ।
दशम में मंगळ शनि-राजा से नहीं मिलने वाला, धन वाला, किसी अपराध में
राजा से दण्डित, विभव से हीन ।