भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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नाभस आदि योग : ३९%

१६--छत्र योग-सप्तम से लग्न तक १७--चाप (धमुष-कामुंक) योग-दश सब ग्रह हों । प्रत्येक भाव में गृह हों। भाव से चतुर्थं भाव तक सब गृह हों एक एक करके ७ गूह ७ स्थानों में हों ।

१८--अद्धंचंद्र योग-पूर्वोक्त नौका, कूट, छत्र और चाप में जो योग बताये हैं उनको छोड़ कर उनके विरुद्ध शेप किसी स्थान से लगातार सव गूह एक-एक करके

७ स्थानों में हों इसके ८ भेद हो जाते हैं।

[१] २ भाव से ८ भाव तक लगातार ७ घरों में १,१ गृह ।

[२] ३ भाव से ९ भाव तक लगातार ७ घरों में १,१ गृह ।

[३] ५ भाव से ११ भाव तक लगातार ७ घरों में १-१ गृह ।

[४] ६ भाव से १२ भाव तक लगातार ७ घरों में १-१ गृह ।

[५] ८ भाव से २ भाव तक लगातार ७ घरों में १-५ गृह ।

[६] ९ भाव से ३ भाव तक लगातार ७ घरों में १-१ गृह ।

[७] ११ भाव से ५ भाव तक लगातार ७ घरों में १-१ गृह ।

[८] १२ भाव से ६ भाव तक लगातार ७ घरों में १-१ गृह 1