सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 404, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंयक त क्क pe ह
३९४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
११. शर (इणु या इषु) योग-चतुर्थ
१०. यूप (यूपक) योग- लग्न से चतुर्थ से सप्तम तक सब ग्रह हों जैसा यहाँ
तक सब् ग्रह हों अर्थात्, १, २, ३ और बताया है अर्थात् लग्न से ४,५,६,७ भाव
४ भावों में सबग्रह हों । में सब ग्रह होना । ८
१२. शक्ति योग--सप्तम से दशम भाव १३. दंड योग--दशम भाव से लग्न
तक सब ग्रह हों अर्थात् लग्न से ७,८,९, तक सब ग्रह हों अर्थात लग्न से १०,११,
१० भाव में सब ग्रह हों । १२ और ९ स्थान में सब ग्रह हाँ ।
१४. नौका योग- लग्न से सप्तम तक १५ कूट योग--चतुर्थ भाव से दशम
प्रत्येक भाव में एक-एक गृह हो ७ भाव भाव तक प्रत्येक भाव में एक-एक करके ७
हक ७ गृह हों || गृह ७ स्थानों में हो ।