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भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 409, कुल 454 में से

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नाभस आदि योग : ३९९

. वु. गु २ सू. चं. मं. वु. ८ सू. चं. वुः गु. श, १५ सू. वु. गु, शु. श,

३ सू. चं. शु ९ सू. चं. बु. शु. श. १६ च. मं. बु. गू. शु.

डे सू. च॑,

मं. बु. श १० सू. चं. गु. शु. श. १७ चं. मं. बु. गु. श,

५ सू.

मं. गु. शु ११ सू. मं, वु. गु. शु. १८ चं. मं. बु. शु, शे.

६ सः चं.

चं. मं. गु. श १२ सू. मं. बु. मु, श १९ चं. मं. गु. शु. श.

७ सू. मं. शु. श. १३ सू. मं. बु. शु. श २० चं. बु. गु. शु. श. चं. बु. गु. शु. १४ सू. मं. गु. शु. श. मं बु. गु. शु, शः ५ ° २१ ६. युग योग में ६ ग्रह एक साथ होने से ७ भेद हो गये हैं । १ सूर्य चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु शुक्र ५ सुयं, चन्द्र, बुध, गुरु, शुक्र, शनि २ सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शनि ६ सूर्य, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि है सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, शुक्र, शनि ७ चन्द्र, मंगल: बुध, }

७.

४ सूर्य, चन्द्र, मंगल, गुरु, त शनि RST गोल योग--७ ग्रह एक स्थान में होने से १ ही भेद होता है। १. सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि । ३. आश्रय योग--चर-स्थिर-द्विस्वभाव में उत्पन्न इन तीन प्रकार की राशियों के आश्रय होने के कारण “आश्रय योग” कहे जाते हैं । १--रज्जू योग-सभी ग्रह चर राशियों में हों। २~~मूसल योग-सभी ग्रह स्थिर राशियों में हों। ३--नल योग-सभी ग्रह॒ द्विस्वभाव राशियों में हों । ४. दल योग-इसके २ भेद हैं । १--माला (सरग) योग-सव शुभ ग्रह केन्द्र में हों पाप ग्रह केन्द्र में न हों । २--सपं योग-सब पाप ग्रह केन्द्र में हों शुभ ग्रह केन्द्र में न हों । यहाँ तीनों केन्द्रों में सब शुभ ग्रह हों और पाप ग्रह केन्द्र के बाहर हों तो माला योग होता है । इसके ५, विरुद्ध सपं योग है जिसमें तीनों केन्द्रों में पाप ग्रह हों और शुभ- ग्रह केन्द्र के बाहर हों ।

इन योगों के फल पर विचार

१--संख्या योग की प्राप्ति में आकृति योग भी हो तो आकृति योग फल देगा । संख्या योग का फल नहीं होगा । - २--आश्रय योग में आकृति योग हो जावे तो आकृति योग ही फल देगा । रै--दल योग में संख्या योग की प्राप्ति हो तो दछ योग ही फल देगा । ४--दल योग और आश्रय योग मिल्वां हो तो उपरोक्त दल योग सरीखा साधारण फल होगा ।

५---संख्या योग में पूर्वोक्त आश्रय योग भी हो तो आश्रय योग ही फल देगा । संख्या योग का फल नहीं होगा । आश्रय योग न हो तब संख्या योग फल देगा ।

६--आश्रय योग में-शुभ ग्रह शुभ फल देते हैं पाप ग्रह पाप फल देते हैं आश्रय योग में उत्पन्न प्राणी कुछ विख्यात होता है ।