भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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४०६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

३--३ ग्रह के भेद

[१] म. बु. गु. । [२] मं. बु. शु. । [३[ मं. वु. श. । [४] मं. गु. शु. ।

[५] मं गु. श,। [६] मं. शु. श. । [७] बु. गु. शु. । [५] बु. गु. श. ।

[९] बु, शुः श. । [१०] गु. शुः श. । १० भेद

४-४ ग्रह के भेद—

[१] मं. बु. गु. शु. । [२] सं. बु. गु. श. । [३] मं. बु. शु. श. । न

[४] मं. गु. शु. श, । [५] वु. गु. शु. श । ५ भेद

५-५ ग्रह का भेद--

मं. बु. गु. शु. श. । १ भेद

सुनफा के ३१ भेद के अनुसार अनफा के भी ३१ भेद होते हैं । योग ३१

३. अनफा योग--चन्द्र से १२वें स्थान में सूर्य को छोड़कर और कोई मंगल आदि ग्रह में से कोई हो तो अनफा होता है ।

मतांतर--चन्द्र से केन्द्र व नवांशकं में भी इस योग का विचार होता है जैसे [१] चन्द्र से दशम स्थान में मंगल आदि ग्रह में से एक या अधिक ग्रह हो तो अनफा

होता है। या [२] चन्द्र जिस नवांश पर हो उससे १२वीं राशि पर मंगल आदि ग्रह हो तो अनफा योग हो जाता है।

इसके भी सुनफा योग सदृश ३१ भ्रेद हो जाते हैं । सुनफा में चन्द्र से दूसरे स्थान पर जैसे योग बनते हैं उसी प्रकार अनफा योग से भी चन्द्र से १२वें स्थान में ग्रह होने से उपरोक्त बताये प्रकार से ३१ भेद हो जाते हैं। इन दोनों 'योगों में केवल स्थान के भेद का ही अन्तर है परन्तु योग के ३१ भेद पूर्ववत्‌ हैं। इस प्रकार दोनों के मिलाकर ६२ भेद हो जाते हैं ।

४. दुरुरा--चन्द्र से दूसरे और वारहवे दोनों स्थानों में ग्रह हों तव वह योग होता है ।

अन्यमत--चन्द्र के केन्द्र और नवांश से भी इस योग का विचार होता है जैसे-- १. चन्द्र से चतुर्थ और दशम दोनों स्थान में ग्रह हो तो दुरुधरा योग हो जाता है। या २. चन्द्र जिस नवांश में हो उससे दूसरे और वारहवें दोनों स्थानों में ग्रह हो तो दुरुधरा योग हो जाता है । इन तीनों योग में योग कारक ग्रह के साथ सूर्ये भी हो तो योग का प्रभाव नहीं रहता ।

दुरुधरा योग के १०८ भेद हो जाते हैं जो आगे दिये हैं । दुरुधरा के १०८ भेद

चन्द्र से एक दूसरे भाव में दूसरा बारहवें भाव में या दूसरा बारहवें भाव में और पहिला दूसरे भाव में।

[२] २ ग्रह योग के २० भेद--