भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 417, कुल 454 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 417

नाभस आदि योग : ४०७

[१] मं- बु. [१] बुः मं. [१] बु. ग्‌. [५] ग्‌ बु. [|] ग्‌_ शु. [=] शु. गु. [२] मं. ग.. [२] ग्‌. सं. [६] बु. शु. ६] श्‌. बु. [९] गू. शः [१] श, गु. [३] मं. शु. [३] शु. मं. [७] बु. श. ]७] श. बु. [१०] शु. श. [१ ०] शु. श. [४] मं. श. [४] श. म॑. । यहाँ २ ग्रह के १० योग हैं और इन योगों के विरुद्ध १० योग ओर हैं जिनको मिलकर सव २० योग हो जाते हैं। (२) ३ ग्रह के योग के ६० भेद हैँ । दूसरे भाव में एक और १२वें भाव में २ ग्रह या इसके विरुद्ध १२वें भाव में १ ग्रह और दूसरे भाव में २ ग्रह। इस प्रकार ३० योग होते हैं और उनके विरुद् योग ३० हुये । सव मिलकर ६० योग हो जाते । १- मं०-बु ० गु० १--वु०-मं० गु० १०>-गु०-मं ० बु० २--मं ०-बु ० शु० २--बु ०-में ० शु० २--शु ०-मं ० बु० ३--मं०-वु० श° ३-बु०--न्सं० शब ३--श०-मं० बु० ४--मं०-गु० शु० ४--गु०-मं० शु० इ--शु०-मं० गु० भू--में ०-गु० श० ५—गु०-मं० श० प्र---श ०-मं ० गु० ६--मं०-शु० श० ६--शु०-मं० श० ६--ण०-मं० गु०

७--बु०-गु० श० ७--गु०-बु० शु० ७--शु०-वु० गुण

८--बु०- गु० श० ८--गु०-बु० श० ८--श०-बु० ग्‌,०

९--बू ०-शु ० श० ९--शु ०-बु ० श० $६--श ०-बु ० शु० १ ०-गु०-शु० गण १ ०-शु०-गु० श० १०-शण०-गु० शु० यहाँ ३ ग्रह के योग १० हैं तीनों ग्रहों को पृथक्‌ २ करने से एक योग के ३ भेद हो जाते हैं इस प्रकार १० योग के ३० भेद हो जाते हैं। उपरोक्त बताये प्रकार से विरुद्ध ३० भेद और हो जाते हैं सव मिलकर ३ ग्रह के ६० भेद हो जाते हैं । ४ ग्रह के योग

२ ग्रह दूसरे भाव में २ ग्रह वारहवें भाव में--इसके ३० भेद

१--मं ० बु०-गु० शु० १—यु° शु०-मं० बु०

२-मं० बु०-गु० श० २-गु० श०-मं० बु०

३--मं० बु०-शु० श० ३--शु० श०-मं० बु० (४) म? गु०-बु० शु (४) बु० शु०-में० गु० (५) मं० गु०-वु० श० (५) बु० शर-मं० गु० (६) मं० गु०-शु० श० (६) शु० श०-मं० गु०

(७) मं शु०-बु० गु० (७) बु० गु०-मं० शुर

(=) मं० शु०-बु० श० (<) बू० श०-मं० शुर

(९) मं० शु०-गु० श० (९) गु० श-मं० शु०

(१०)मं० श्‌०-बु० गु० (१०)बु० गु०-मं० श०