सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 42, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें. ३४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतोय फलित खण्ड
परोपकारी ( मान० ) । थोड़ा बोलने वाला, धन रहित, राजाश्चयी, पराये कार्यों
में शूरता करने वाला, पुत्र स्त्री से युक्त, बुद्धिमान्, नेत्र रोगी, धनवान् ( जा०
पारि० )।
ही गुरु शनि--स्त्रियों में नित्य धन व्यय, बोलने में चतुर, स्त्री पुत्र आदि का
सुख, राजा का प्रिय ( शंभू० ) पुत्र मित्र कलत्र से युक्त, भय रहित, राजा से द्वेष
अपनी इच्छा से मित्रता करने वाला ( मान० )। राजा का प्यारा, मित्र, स्त्री पुत्रों
के सहित, शोभायमान शरीर, अच्छी नीति में खर्च, निर्भय बोलने वाला (जा० भ०) ।
भय रहित, राज प्रिय, सात्विक ( जा० पारि० ) ।
सूर्य शुक्र शनि--धन, काव्य कथा और अपने मनुष्यों से त्यक्त, दुष्ट चरित्रो में
रुचि, अति भयवान् खुजला का रोग ( शंभु० )। कारीगरी तथा मान से रहित,
कुष्ठी, शत्रुओं के कारण सदा भय, दुष्टों के समान आचरण ( मान० ) । शत्रु के भय
से युक्त, श्रेष्ठ कथा और काव्य रहित, खोटे कमं में प्रीत, अति पीड़ित, धन और
बन्धु वर्ग से हीन ( जा० भ० ) । दुष्ट चरित्र वाला गर्वी, अभिमानी (जा० पारि०) ।
(२) चंद्र मंगल बुध- अत्यन्त दीन, अपने मनुष्यों से अपमानित, अन्त, धन से
हीन, दीन मनुष्यों के अनुकूल रहने वाला ( शंभु० )। नीच के समान आचरण, बड़ा
पापी, जीविका से हीन, लोक में बन्धुहीन ( मान० ) । दीन, धन धान्य रहित, अपने
बन्धु वर्गों से दंभ नीच जनों का साथ ( जा० भ० )। सदा भोजन में रत, दुष्कर्मी,
दूसरों का दूषक ( जा० भ० ) । “4
चंद्र मंगल गुरु स्त्री युक्त, निर्मल देह, दुसरे के शुभ कार्यों को समझ लेने वाला,
कोप युक्त, धाव से चिह्नित ( शंभु० ) । वडा कामी, वर्ण से युक्त, सबको प्रिय, स्त्री
जनों के साथ रहने वाला, चन्द्र समान सुन्दर मुख ( मान० ) । वर्ण युक्त, क्रोधी
पराया धन हरण करने वाला, स्त्री में तत्पर, शोभायमान शरीर ( जा० भ० ) ।
रोषयुक्त वचन, कामातुर, रूपवान् ( जा० पारि० ) ।
चंद्र मंगल शुक्र- दुष्ट स्वभाव की स्त्री, चंचल दुष्ट स्वभाव, पुत्र सुशील हो ( शंभु० ) । दुष्ट स्वभाव वाली स्त्री तथा माता से युक्त, सर्वेत्र भ्रमण करने वाला,
शीत से डरने वाला ( मान० ) । दुष्ट शीला स्त्री का पति, अस्थिर, दुष्ट शीला माता
की सन्तान, थोड़ा शील ( जा० भ० ) । शील हीन, पुत्र हीन, भ्रमणशील ( जा०
पारि० ) ।
चन्द्र मंगल शनि--बाल्यावस्था में माता की मृत्यु, सदा कलह से सन्तप्त, निद्य
( शंभु ) । बालपने में माता मरे, दुष्ट मनुष्यों को देखने मात्र से ही द्वेषी होने वाला
विषमतायुक्त, ( मान० ) । बालपने मैं माता की मृत्यु, सदा कलह युक्त, निदित
( जा० भ० ) । चंचल बुद्धि, दुष्टात्मा, माता को मारने वाला ( जा० पारि० ) 1
चन्द्र बुध गुरु बुद्धिमान्, बड़ा तेजस्वी, बड़े ऐश्वयं वाला, उत्तम विद्या, अनेक
` मित्र, विख्यात कीति ( शंभु० ) । बड़ा तेजस्वी, धनवान्, पुत्र मित्र से युक्त, प्रशस्त