भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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अनेक ग्रहों के एक राशि ये होने का फल: ३५

प्राणी, विख्यात, कतिमान्‌ ( मान० ) । प्रसिद्ध यश, बुद्धिमान, वडा प्रतापी, विचित्र

मित्र, भाग्यवान्‌, श्रेष्ठ कृति ( अच्छा आचरण ) ( जा० भ० ) । भारी धनी, राजा

का प्रिय ( जा० पारि० )।

चन्द्र बुध शृक्र -बडी स्पर्धा से युक्त, ईर्ष्या करने वाला, उत्तम विद्या, नीच बुद्धि,

अति धन लोभी ( शंभु० ) । विद्या से विभूषित, ईर्ष्यालु, घन का अत्यन्त लोभी, दुष्ट

आचरण (मान ० )। विद्या में प्रवीण, नीच वृत्ति, सबसे द्रोह या निदा करने वाला,

धन का लोभी (जा० भ०) । विद्वान्‌, नीच कमं वाला, सेवा करने योग्य (जा० पारि)।

चन्द्र बुध शनि --ख्यात, नम्र, राजा के मनोनुकूल, नगर ग्राम का अधिकारी,

कला विद्या जानने वाला, बुद्धिमान्‌ ( शंभु० )। बड़ा बुद्धिमान्‌, राजा पूज्य, बड़ा

लम्बां, बड़ा दुष्ट, प्रशस्त वाणी, कलाओं के समूह में निर्मेल बुद्धि, विख्यात, राजा

का प्यारा, ( मान० )। नगर ग्राम का पति, नम्रतायुक्त ( जा० भ० ) । दानी,

राज पूजित, गुणवान्‌ ( जा० पारि० ) ।

चंद्र गुरु शुक्त--अधिक ऐश्वयं, शुभ गुण, कीतिमान्‌, उत्तम बुद्धि, वृद्धि युक्त

( शंभु० )। पतिब्रता माता का पुत्र, बड़ा पंडित, साधु, सब कलाओं का ज्ञाता, अति

“सुन्दर ( मान० ) । भाग्यवान्‌, सुन्दर कीति, वुद्धिमान्‌, श्रेष्ठ वृत्ति (जा० भ० ) ।

प्राज्ञ, सुपुत्री,कला में निपुण ( जा० पारि१) ।

चंद्र गुरु शनि---उत्तम मंत्र शास्त्रों को जानने वाला, सुन्दर वेश, राज प्रिय,

अत्यन्त चतुर, बड़ा तेजस्वी ( शंभु० ) । रोग से रहित, स्त्रीसंग करने वाला, शास्त्रार्थ

जानने वाला, सर्वज्ञ, ग्राम नगर का पालन करने वाला ( मान० ) । चतुर, राजा का

प्यारा. श्रेष्ठ, मंत्र शास्त्र में अधिकारी, उत्तम वेश. बडा प्रतापी ( जा० भ० ) ।

शास्त्री, वृद्धा स्त्री में रत, राजा के तुल्य ( जा० पारि० ) ।

चंद्र शुक्र शनि--उत्तम ग्रन्थ देखने में श्रद्धालु, उत्तम लेखनी में भी रुचि, पुण्य में

तत्पर, वेद पाठियों में श्रेष्ठ और पुरोहित होवे (शंभु०) । लेखक का काम करने वाला,

चेद ज्ञाता, पुरोहित के कुल में जन्म, कथा कहने वाला ( मान० ) । पु रोहित, वेद के

ज्ञाताओं में श्रेष्ठ, पुण्य कर्म करने में तत्पर, श्रेष्ठ पुस्तकों को देखने और लिखने

चाला ( जा०भ० ) । वेद ज्ञाता, राज पुरोहित, अत्यन्त सुभग ( जा० पारि० ) ।

(३) मङ्गल बुध गुरु छुल मैं श्रेष्ठ, श्रेष्ठ कविता, गीत कला का आदर करने

वाला, पराये साधन में अत्यन्त मन रहे ( शंभु० ) । बड़ा सत्कवि, स्त्रियों का प्रिय,

परोपकारी, बड़ा उत्साही, गान विद्या में कुशल ( मान० ) । कुछ में धरती का पालन

करने वाला राजा के समान, काव्य और गाने बजाने की कला में प्रवीण, पराये कार्य

साधन में एक चित्त (जा०भ>) । गंधवं विद्या, काव्य, नाटक का ज्ञाता (जा०पा०) ।

मंगल बुध शुक्र-वाचाल, अत्यन्त चपल, दुबला शरीर, सदा उत्साही, धनवान्‌,

( शंभु० ) । किसी अंग से हीन, बड़ा चंचल, हीन कुल में जन्म, सदा उत्साह युक्त,

तृप्त और चुगलखोर ( मान० )। धन सहित दुर्बल देह, बड़ा बोलने वाला,

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