सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 430, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें४२० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
दृष्टि हो तो २२ वर्ष के भीतर वुद्धि प्रधान, राज्य, संतति युक्त हो शत्रु को जीतने
चाला हो ।
४१. श्रीनाथ योग- -सप्तमेश केन्द्र में हो, दशमेश उच्च में होकर नवमेश के साथ
हो । फल- इन्द्र के समान राजा हो ।
४२. मृदंग योग-लग्नेश शुक्र से युक्त परमोच्च स्थान में हो और परमोच्च
स्थानाधिपति केन्द्र में हो तो राजा, ग्रामाधिपति; वाहनाधिपति व सुख युक्त हो । अन्यलग्नेश वली हो और अपने उच्च या गृह में होकर अन्य ग्रह केन्द्र में हों तो मृदंग योग
होता है । फल--सुखी, राजा, या राजा के तुल्य हो ( वृ० पा० । अन्य--उच्चगत
ग्रह का नवांश पति केन्द्र या त्रिकोण में हो और अपने उच्चगृही या स्वगृह में होकर
बलवान् हो लग्नेश भी बली हो तो मृदंग योग होतो है ।फल--कल्याण रूप, राजा के
सदृश यश ( जा० पारि० ) ।
४३. शारद योग--१-दशमेश पंचम में, बुध केन्द्र में, सूर्य स्वगृही हो, २-या चन्द्र
से ५,९ भाव में गुरु व बुध हो, ११ भाव में मंगल हो तो शारद योग होता है । फल
राजमान्य तपस्वी धर्मात्मा ( वृ० पा० ) ।
अन्य--१-दशमेश पंचम में हो, बुध केन्द्र में, सूर्य स्वगृही हो या, २-चन्द्रमा से
त्रिकोण में गुरु, बुध से त्रिकोण में मंगल, बुध से लाभ में शुभ ग्रह हो तो शारद योग
होता है । फल-र्स्त्री पुत्र बंधु सुख गुण में अनुरक्त, राजा का प्रिय, गुरु ब्राह्मण देवभक्त विद्या विना ही, कामुक तप तथा बल युक्त स्वधमं में लीन ( जा० पारि० )1
४४-सुख योग--धन; भाग्य लाभ स्थानेश कोई एक चन्द्र के केन्द्र में हो तो १६
वषं के भीतर सुखी राजा हो ।
४५-साम्राञ्य योग-नवमेश अंश चक्र में जिस राशि पर हो उस राशि का स्वामी
गुरु से युक्त धन राशि में हो ( गुरु धन राशि का भाग्येश हो ) तो निसंदेह राजा हो।
४६-दुर्गेश योग-राहु स्थित अंश राशि का स्वामी पंचम नवम दा उच्च का हो
और मंगळ षडयन्त्र युक्त हो नवमेश सप्तम स्थान में हो तो वन भूमि का अधिपति हो ।
४७-अर्थ योग-द्वितीयेश और चतुर्थेश नवम में हो नवमेश बलवान् होकर द्वितीय
स्थान में हो, लग्नेश उच्चगत लाभ में हो तो कोटी का घन पति हो ।
४८-न्रिकूट योग-लग्न चर राशि हो उसमें गुरु हो, स्थिर राशि में शुक्र हो
ढिस्वभाव राशि में बुध हो तो दुगं का अधिपति हो ।
४९-चामर योग-चतुर्थेश उच्च में हो, उच्च स्थानेश भाग्य स्थान में हो और
लग्नेश से युक्त हो तो राज पूजित, देश अधीश्वर, विद्वान् ग्रंथकर्ता, सभा वांदकारी,
सुख सम्पन्न, गौरवशाली हो । अन्य १-छग्नेश उच्च का होकर केन्द्र में हो उस पर
शुभ ग्रह की दृष्टि हो या, २-शुभ ग्रह ९,१० या ७ भाव में हो । फल--राजा या
राज मान्य, दीर्घायु, पंडित, वक्ता, सब कलाओं का ज्ञाता ( वृ० पा० ) । अन्य
१-लग्नेश उच्च का होकर केन्द्र में हो गुरु से दृष्ट हो या २,१,७,९,१० भाव में २