भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 48, कुल 454 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 48

४० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

चाला, सुखी, पुत्रवान्‌, स्त्री युक्त, वाणी की ही वृत्ति वाला (७० चं०) स्त्री पुत्र धन

से युक्त, विद्वान्‌, अल्पभोजी, सुखी, कार्यों में निपुण, कृपालु, (जा० पारि०) ।

सूर्ण चन्द्र मंगल शनि-मूखं, धन से रहित, ठिंगना, विषम देह, भिक्षा वृत्ति

(मान०) । मूर्ख दरिद्री, हृस्व विषमदेह, भिक्षावृत्ति (७० चं०) । चंचल नेत्र, घूमने

बाला, व्यापारिणी स्त्री का.पति निर्धन, (जा० पारि०) ।

सूर्य चन्द्र बुध गुरु-कारीगरी जानने वाला, धनवान्‌, सुन्दर रंग, रूप वाला,

सुन्दर नेत्र, रोग रहित (मान०) । कारीगरी करने वाला, घनी, सुन्दर वणं, प्लुत नेत्रो

चाला, रोगहीन ( ल० चं० ) । मित्र पुत्र स्त्री युक्त, धनवान्‌, गुणी, यशस्वो, वलवान्‌,

उदार ( जा० पारि० )

सूयं चन्द्र बुध शुक्र- सुन्दर ठिंगना शरीर, राजाओं का माननीय, प्रशस्त वाक्य,

विफल ( मान० ) । सौभाग्यवान्‌, हृस्व, राजाओं में पूज्य, बाणी में निपुण, विफल

( छ० चं० ) । विफल वाचाल ( जा० पारि० )1

सूर्य चन्द्र बुध शनि-भिक्षावृत्ति, मातापिता से वियुक्त, नेत्रों से विकल, निर्धन

( मान० ) । भिक्षुक, माता पिता से दियोगी, विकल नेत्र, दरिद्री ( ल० चं० ) ।

निर्धन, कृतज्ञ ( जा० पारि० ) ।

सूर्य चन्द्र गुरु शुक्र-राजपूज्य, तालाब आदि, जंगल तथा मृगों का स्वामी, बड़ा

निपुण,सदा सुखी (मान०) । राजाओं में पूज्य जल वन और मृगो का स्वामी, निपुण,

सुखी (० चं० )। जल में वन स्थल में, चलने वाला, राज पूज्य, भोंगी

( जा० पारि० ) 1 $

सूर्य चन्द्र गुरु शनि-माननीय, स्त्री का प्रेमी, बड़ा घनो, पुत्रवान्‌, क्षीणदेह समान

और सुन्दर नेत्र ( मान० ) । पूज्य और स्त्री को प्यारा, बहुत द्रव्य और पुत्रों वाला,

तीक्ष्ण और समनेत्र ( ७० चं० ) विशाल नेत्र, बहुत धन पुत्र से युक्त, वेश्या का

पति ( जा० पारि० ) ।

सूर्ये चन्द्र शुक्र शनि-दुबला, स्त्री के समान आचरण, डरपोक, अगुवा! (मान० )1

निमेळ, डरपोक, कन्याओ के द्वारा धनोपार्जन, खाने पीने में तत्पर ( जा० पारि )।

अत्यन्त दुर्वेल, स्त्री के समन आचार, डरपोक, आगे चलने वाला ( ल० चं० )।

सूर्य मंगल बुध गुरु सूत्र करने वाला, पर स्त्री रत, शूरवीर, सदादुःखी, चक्र को

धारण करने वाला ( मान० ) ( ल० चं० )। सवल, विपत्ति से युक्त, स्त्री सम्पत्ति बाला, नेत्र रोगी, भ्रमणशीळ ( जा० पारि० ) । गन

सूर्य मंगल बुध शुक्र-पूज्य, धनवान्‌, सुन्दर, राजमान्य, नीतिमान्‌ ( मान० ) । दूसरों की स्त्री में लीन, विषम छोटे बड़े या टेढ़े नेत्र, चोर बुद्धि, धनादि से रहित

( जा० पारि० )।

सुयं मंगल बुध शनि-योद्धा, कवि, राजमन्त्री, वडा तीक्ष्ण, नीचो के समान आचार (मान०) । योधा, कवि, मंत्री, सेनापति, तीक्षण और नीचा आचार वाळा (७० चं०) ।