भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 47, कुल 454 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 47

अनेक ग्रहों के एक राशि में होने का फळ : ३९

तवम में गुरु शुक्र शनि- अन्न पान, विभव वाला, सुन्दर स्थान, ऐश्वयं युक्त,

सुन्दर रूप ।

चन्द्र से दशम में त्रिग्रह योग फल.

सूर्य मंगल वुध--धन युक्त, राज जन पूज्य, सवंजन पूज्य ।

सूयं मंगल गुरु-सुन्दर ऐश्वर्य, सम्पन्न शत्रुं को जीते, समृद्धि युक्त ।

सूर्य मंगल शुक्र--क्रूर, साहसी, पर धन हरने वाला ।

सूर्य मंगल शनि--क्रूर कर्म, छिपे पाप, दुराचारी ।

सूर्य बुध गुरु--विद्वान्‌, रूपवान्‌, ऐश्वयंवान्‌, धर्मात्मा, प्रिय ।

सुर्य बुध शुक्र--वड़ा यश, धर्मात्मा, क्रोधहीन, नहीं पराजित होने वाला,

सौभाग्य, सामग्रियों से युक्त, समृद्धि उत्पन्न करते हैं।

' सूर्य बुध शनि--क्रूर, चपल, शील हीन, शस्त्र अग्नि से विदीणं शरीर ।

सुं गुरु शुक्र-सुन्दर ऐश्वर्य, विद्या से प्राप्त धन, धर्म में प्रीत, योग भागी ।

सूयं गुरु णनि-रोगी, अति चपल, समस्त जनों से हीन ।

मंगल बुध गुरु-धर्मात्मा, बहुत कुटुम्ब, अनेक प्रकार का धन।

` मंगल बुध शुक्र-अच्छी कारीगरी से युक्त, मालाकार, सुवर्णकार, सब लोक

में हानि करने में युक्‍त ।

मंगल बुध शनि-धमं शील और निद्रा युक्‍त, सरल स्वभाव, सत्यभाषी ।

मंगळ गुरु शुक्र-धन युक्त, नीतिशास्त्र का ज्ञाता, देव ब्राह्मण का प्रेमी ।

मंगल शुक्र शनि-मलिन, असत्य भाषी, वध, बन्धन, विवाद इनसे युक्‍त ।

बुध गुरु शुक्र-इष्ट मित्रों से युक्त, धनी, अति सोभाग्य वाला, धर्मात्मा,

सात्विक गुण युक्‍त, धीर।

बुध शुक्र शनि-धन धर्मं से युक्त बुद्धि वाला, दयालु, सत्यभाषी ।

गुरु शुक्र शनि-अनेक रोग, विज्ञानी, सुजन, परदेशवासी ।

चतुग्रंह योग का फल

(१) सूर्य चन्द्र मंगल बुध-लिखने की जीविका करे, चोर, चुगलखोर, बड़ा

मायावी. प्रशस्त वाणी, बड़ा कुशल, ( मान० ) । लेखक का काम करनेवाला, मुखर

वाणी और माया में निपुण, वैद्य (लग्न चन्द्रिका) | मायावी, प्रपंची, लेखक, रोगी

( जा० परि० ) ।

सूर्य चन्द्र मंगल गुरु बड़ा निपुण, घनवान्‌, तेजस्वी, शोक रहित, नीतिज्ञ

(मान०) । प्रसंग में निपुण, घनी, तेजस्वी, शोकरहित, नीतिज्ञ (ल० चं०) । धनवान्‌

यशस्वी, बुद्धिमान्‌, राजा का प्रिय करने वाला, निरोग, निश्चिन्त (जा० पारि०)।

सूर्य चंद्र मंगल शुक्र-विद्या घन संग्रह कर्ता, सदा सुखी, पुत्र कलत्र युक्त, वाणी

से वृत्ति करने वाला (उपदेशक आदि) (मान०) । विद्या और धन का संग्रह करने