भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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४२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

` बुद्धिमान्‌ (ल० चन्द्रि0) पापकर्म में निपुण, निद्रालु, धनादि में आतुर (जा० पारि०) ।

चन्द्र मंगल गुरु शनि-क्रान से बहरा, धनवान्‌, पागल, दृढ प्रतिज्ञ, शूरवीर,

विद्वान्‌ ( मान० ) बहरा, घनी, उन्माद युक्त, स्थिर वचन वीर और जानने वाला

(७० चन्द्रि० )

चन्द्र मंगल शुक्र शनि-मछिन, सत्री कुलटा, सदा घबड़ाहृट युक्त, सपे के समान

नेत्र, बड़ा प्रगल्भ, ( ढीठ ) ( मान० ) । शूद्री का पति, उद्वेगयुक्त, सर्प के तुल्य नेत्र,

प्रगल्भ ( छ० चन्द्रि० ) । -

चन्द्र बुध गुरु शुक्र-सुमन, धनवान्‌, मातापिता से रहित, वड़ा विद्वान्‌, शत्रु से

रहित, सौभाग्यवान्‌, धनी, दो माता पिता वाला, बुद्धिमान्‌, शत्रु रहित ( मान० )

( ७० चन्द्रि० ) ।

चन्द्र बुध गुरु शनि-बग्धुजनों का प्रिय, बड़ा कवि, तेजस्वी, राजा का मन्त्री,

यश धर्म युक्त ( मान० ) ( छ० चन्द्रि0) । बड़ा धनी, बन्धु प्रिय, धामिक ( जा०

पारि० ) । १

. चन्द्र बुध शुक्र शनि-राज पुज्य, नेत्र रोगी, शहर का स्वामी, अनेक स्त्री, धनवान्‌

( मान० ) ।

चन्द्र गुरु शुक्र शनि-परस्त्री गामी, बुद्धिमान्‌, दरिद्र भाई वाला, मोटी स्त्री,

पुरुषों में श्रेष्ठ ( मान० ) । पर स्त्री से प्रेम, बुद्धिमान्‌, द्रव्यहीन भाइयों वाला, मोटी

स्त्री ( छ० चन्द्रि० ) ।

मंगळ बुध गुरु शुक्र-स्त्री से कलह करने वाला, धनवान्‌, सुशील, रोगरहित,

लोक पूज्य (मान०) स्त्री कलह प्रिय, धनी, सुशील, निरोग; संपार में पूज्य (छ० चं०)'

धनवान्‌ और निन्दित ( जा० पारि० ) ।

मंगळ बुध गुरु शनि-शूरवीर, निर्धत, सत्य, शौच वृत्तादि का विचार करने वाला,

दोन और प्रशस्त वाणी ( मान० ) । शूर, द्रव्यहीन, सत्य और सुख युक्त, विद्वान्‌,

चाद करने वाला, याणी में निपुण ( छ० चन्द्र० ) । रोगी, घनहीन (जा० पारि०) ।

मंगल बुध शुक्र शनि-दुसरो से पाला हुआ, पहलवान, युद्ध करने याला, लोक में

विख्यात, दृढ़ अङ्ग, कुत्ता पालने वाला ( मान० ) मल्ल और पुष्टि में योद्धा, प्रसिद्ध

पृष्ट अङ्ग, कुकर्म में रुचि ( छ० चन्द्रि )

सगळ गुरु शुक्र शनि-क्रामी, परस्त्री गामी, वड़ा अभिमानी, कपटी (मान०) ।

साहस प्रिय, धनी, तेजवान्‌ स्त्री में चंचल और धूतं ( ल० चं० ) ।

बुध गुरु शुक्र शनि-चतुर, काम में आसक्त, सत्यवक्ता, तीव्र बुद्धि (मान०)।

कामातुर, विधेय भृत्य, बुद्धिमान्‌, तीब्र, शास्त्र में रत ( ७० चन्द्रि० ), खूब धनी,

विद्वान्‌, शीलवान्‌ ( जा० पारि० ) । प

नवम भाव में चतुग्रह योग का फल

सूर्य चन्द्र मंगल बुध-उत्तम पुरुष. विदेशगामी. सदा प्रसन्न ।

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