भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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ककीकरण ome

अनेक ग्रहों क्रे एक राशि में होने का फल : ४३

सुर्य चन्द्र मंगल गुरु-धनवान्‌, विद्या में निपुण, सुन्दर ऐश्वर्ययुक्त, राजा तुल्य ॥

सूर्य चन्द्र मंगल शुक्र-माया करने में चतुर, स्वस्त्री में संतुष्ट, सुन्दर भाग्ययुक्त,

सवंजन प्रिय, विख्यात । `

सूर्य चन्द्र मंगल शनि-चुगुल, मायावी, शुभशील युक्त, नीच कर्मे कर्ता ।

सूर्य चन्द्र बुध गुरु-प्रधान, सब राजाओं से पूज्य, सदा प्रसन्न ।

सूर्य चन्द्र बुध शुक्र-राजा, धर्मात्मा, सम्पन्न, प्रिय भाषी, शांतचित्त ।

सूर्य चन्द्र बुध शनि-नीच आचरण, दीन, पराया धन हरे, सदा आसक्त ।

सुर्य चन्द्र गुरु शुक्र अच्छी बुद्धि, हषंयुकत, धर्मात्मा, सात्विक, गुण सम्पन्न, धीर

सूर्य चन्द्र गुरु शनि-धर्मात्मा, देवभक्त विद्वान्‌, पराये डाह में कष्ट भोगने

वाला ।

सूर्य मंगल बुध गुरु-पितृदेव पूजक, वृद्धो के समान आचरण, गुणवान्‌ ।

सूर्य मंगल बुध शुक्र-निष्ठुर, सुन्दर ऐश्वर्य, साहसी, धूतं, शत्रु का मर्दक।

सूर्य मंगल बुध शनि-पराई स्त्री में तत्पर, खजाना नष्ट, सदैव क्षीण | _

सूर्या मंगल गुरु शुक्र-छोक का वैरी, पिपासा से दुःखी, बालापन में कत्या को

दुषित करने वाला ।

सूर्य मंगल बुध गुरु-पितृदेव पूजक, वृद्धों के समान आचरण, गुणवान्‌ ।

सूर्य मंगल बुध शुक्र-निष्ठूर, सुन्दर ऐश्वर्य, साहसी, धूते ,शत्रु का भदक ।

सूर्य मंगळ बुध शनि-पराई स्त्री में तत्पर, खजाना नष्ट, सदेव क्षीण ।

सूर्य मंगल गुरु शुक्-लोक का वैरी. पिपासा से दुःखी, बालपन में कन्या को

दूषित करने वाला ।

सूर्य मंगल गुरु शनि-सुखहीन, सदा उद्योगी, अति प्रचण्ड, पराक्रमी, धेर्ययुक्त ।

सूर्य मंगल शुक्र शनि-शत्रु के नाश से शोक दूर, क्षुद्र के समान आचरण ।

सूर्य बुध गुरु शुक्र-उत्तम धन सुवणं ऐश्वर्य से युक्त ।

सूर्य बुध गुरु शनि-मानयुक्त, धन सम्पन्न, पाप कमें में तत्पर, परस्त्री गामी,

वैर कर्ता, नीच कर्म कर्ता ।

सूर्य बुध शुक्र शनि-मानयुक्त, सुन्दर ऐश्वर्य, धनवान्‌,सत्यभाषी,छोक विख्यात ।

सूर्य गुरु शुक्र शनि-सत्यभाषी, सुन्दर वचन, गुरु, देव, अध्यापक इनका भक्त ॥

चन्द्र मंगल बुध गुरु-सामग्रियों से युक्त, बालपन में माता से हीन, धनवान्‌ ।

चन्द्र मंगल बुध शुक्र-तपस्वी, विख्यात, सुन्दरभाषी, स्नेहयुक्त, परलोक परायण

बड़ा पंडित।

चन्द्र मंगल बुध शनि-पराङ्‌ मुख, दीन, क्षुद्र, मायी, चतुर, परदारगामी ।

चन्द्र मंगल गुरु शुक्र-राजवंश कर्ता, प्रधान, अति शूर, विद्याधन संयुक्त, लोक

विख्यात, लोक मान्य । चन्द्र संगल गुरु शनि-कुर को ठगने वाला, लोकद्रेषी, दरिद्र शूर कुलोत्पन्न ।