भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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६८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

(६) दशांश (७) द्वादशांश, (८) कलांश (षोड़शांश), (९) त्रिशांश, (१०) षष्ठ्यंश ॥

वर्ग कुण्डली बनाने का उदाहरण

लग्न २रा--२०-११--५३” बुध १०रा.२०१५६'-५६०

सूर्यं ११- ५--- ४०--४५ गुरु ९---१३---३४--९

चन्द्र १०-- २-- ७9२ शुक्र १९-१३---३३---४८

मंगल ७--१२-- २९--४४ शनि ४-- 5--३९--४८

(१) लग्न कुण्डली के अनुसार कोन ग्रह किस स्थान में है उसके अनुसार गृह इतर

होरा द्रेष्काण सप्तमांश नवमांश आंदि निकालने के चक्र आगे दिये हैं उनसे किस वर्ग

में कौन ग्रह किस राशि में है प्रगट होगा । जंसे लग्न २रा.-२०-११'-५३” है

इसका वर्ग निकालना है ।

(१) लग्न कुण्डली में जिस जिस राशि में जो ग्रह है स्थापित होगा ।

(२) होरा मिथुन में १५० के ऊपर और ३०° के भीतर है मिथुन में २०" के

सामने ४ दिया है कर्क का होरा आया ककं का स्वामी चन्द्र है इस कारण चन्द्र का

होरा है लग्न में ४ राशि होरा कुंडली में रहेगी ।

(३) द्रेष्काण चक्र में ९०° के ऊपर ३०” के सामने मिथुन के नीचे ११ दिया

है द्रेष्काण कुंडली का लग्न ११ रहेगा ।

(४) सप्तमांश चक्र में १७-८''के आगे २१°.१५' के भीतर लग्न है इसके

सामने मिथुन के नीचे ७ दिया है । सप्तमांश कुण्डली का लग्न ७ हुआ ।

(५) नवमांश चक्र में २०० के ऊपर २३०-२०' के भीतर लग्न है । २३१-२०' के

सामने मिथुन लग्न के नीचे १ दिया है । नवमांश कुण्डली का लर्न १ हुआ ।

(६) दशमांश चक्र में २१° के भीतर लग्न है इसके सामने और मिथुन लग्न के

नीचे ९ दिया है । दशमांश कुण्डली का लग्न ९ आया ।

(७) द्वादशांश चक्र में २२-३०' के भीतर लग्न है । इसके सामने मिथुन के नीचे ११ है द्वादशांश कुण्डली का लग्न ११ हुआ ।

(८) षोडशांश चक्र में लग्न २०९-३७'-३०” के भीतर है इसके सीध में और मिथुन लग्न के नीचे ७ है । षोडशांश कुण्डली में तुला लग्न आया ! (९) त्रिशांश चक्र में मिथुन विषम राशि है लग्न, २५° के भीतर है इसके सामने मिथुन के नीचे ३ आया । इससे त्रिशांश कुण्डली का लग्न मिथुन ही रहा ।

(१०) षष्ठ्यंश चक्र में लग्नांश २०११-३५” मिथुन के हैं यह २०९-३०' के भीतर है इसके सामने और मिथुन के नीचे ७ दिया है। षष्ठ्यंश कुण्डली में लग्न “तुला आया ।

अन्य मत से २०° ५ २-४० +-१=(३० अंश से कम होने से १ जोड़ा)=४१-:-१२ ऱशेष ५ है । मिथुन छग्न विषय है । मिथुन से सीघे ५ गिना तो तुला आया इससे तुला लग्न आया ।

इसी प्रकार सव ग्रहों का वर्ग निकाल कर आगे चक्र में दिया है ।