भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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७० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

ग्रह वगं की उत्तमांश अनुसार संज्ञा ] उत्तमांश ग्रह मुल त्रिकोण, परमोच्च, स्वगृही, वर्गोत्तम ग्रह उत्तमांश कहे जाते हैं ॥ २ वर्ग में स्वगृही आदि हो तो पारिजातकोश ।

३ वर्ग में स्वगृही आदि हो तो उत्तमांश । ४ वगे में स्वगृही आदि हो तो गोपुरांश । ५ वर्ग में स्वगृही आदि हो तो सिंहासनांश ।

६ वर्ग में स्वगृही आदि हो तो पारावतांश । ७ वे में स्वगृही आदि हो तो देवछोकांश । ४ ८ वर्ग में स्वगृही आदि हो तो अपरांश या कुमकुमांश या. ब्रह्म लोक याः सुरलोक । ९ वर्ग में स्वगृही आदि हो तो ऐरावतांश या शक्रवाहन । १० वर्ग में स्वगृही आदि हो तो स्वांशकीय वैशेषिकांशक या वैष्णवांश या श्रीधाम ) ११ वर्ग में स्वगृही आदि हो तो शैवांश । १२ वर्ग में स्वगृही आदि हो तों भगवदंश । १३ वर्ग में स्वगृहो आदि हो तो वैशेषिकांश । जितने वर्गों की एकता हो उसके अनुसार यहाँ नाम दिया है। इसमें स्वगृही, भूल त्रिकोण उच्च, और वर्गोत्तम जिस जिस' वर्ग में हो उन्को गिनकर उनकी उपरोक्त संज्ञा निर्धारित करना जिसका फल आगे बताया है । अन्य प्रकार-- सप्त वर्ग में अन्य २. स्ववर्ग आदि में किशुक २. में भेदक 5. में चन्दन वन ३. स्ववर्ग आदि में व्यंज ३, में कुसुम ९. में पुर्णचन्द्र ४. स्ववर्ग आदि में चामर ४. में नागपुष्प १७ में उच्चेधवा' ४. स्ववर्ग आदि में छत्र ५, में कंदुक ११. में धन्वन्तरि ६. स्ववर्ग आदि में कुंडल ६. में केरल १२. में सूर्येकान्त ७. स्ववर्ग आदि में मुकुट ७. में कल्पवृक्ष १३. में विदुभ

१४. में शक्र सिंहासन पारिजातकांश आदि वर्ग का फल (१) स्वांश में अह-मशस्वी, बुद्धिमान्‌ और सुखी । (२)

(३)

पारिजातक मे-धनवान्‌, आदरणीय, बहुगुण युक्त, विभव, मान, सौख्य युक्तः ॥ उत्तमांश-सम्पूर्ण विनयी , शक्तियों से उक्त, राजा का मित्र, स्वमाचार निपुण, निरोग । (४) गौपुर-धनवान्‌, सम्पुर्ण विद्या जानने वाला, बन्धुओं में श्रेष्ठ, शुभमति, धन, भूमि, गो, गृहयुक्त । (१) सिहासन-समस्त छोकों में स्तुत्य राजा, बन्धुप्रिय, सम्पत्ति और वैभवयुक्त, राजा का मित्र, या राजा तुल्य ।