सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 85, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंषडूवगे विचार : ७७
( पीया ), बकरे व मृगो के लोभ में व्याकुल चित्त अर्थात् इनसे प्रेम, जंगल में रहना,
चौपाया द्रेष्काण ।
(३) मिथुन का
पहिला द्रेष्काण--स्त्री और चतुष्पद द्रेष्काण है । रूपवती स्त्री सिलाई का और
कसीदे का काम जानने वाली, भूषणों से अति श्रद्धा अर्थात् भूषण पहिने, संतान रहित,
दोनों भुजा उठाये रखे, ऋतुमती या अति कामी । -
दूसरा द्रेष्काण-- पक्षी द्रेष्काण है कवच पहिने, धनुष बाण लिये, वन वगीचे में
खड़ा या रहना । शूरवीर, रणको प्यारा मानने वाला, गरुड़ सरीखा मुख) अस्त्र विद्या
यन्त्र विद्या ( जादूगरी ) जानने वाला, क्रीड़ा ( खेल ) करने वाला, पुत्र, आभूषण
और धन का चितन करने वाला पुरुष पक्षी द्रेष्काण ।
तीसरा द्रेषकाण--पुरुष अग्नि क्रिया मिश्र द्रेष्काण है । बहुत आभूषण से भूषित,
अनेक रत्नयुक्त कवच, धनुष बाण धारण कर्ता, नाचते बजाने गाने में कुशळ, कविता
काव्य आदि रचने वाला पंडित, भ्रमण करने वाला, नर द्रेष्काण ।
(४) ककं का
प्रथम द्रेण्काण--पुरुष द्रेष्काण, चतुष्पद, जल द्रेष्काण, पत्ते फूल फल इनको
धारण करना या खाना, हाथी जैसा स्थूल शरीर, ऊंट जैसे लंबे पैर, घोड़े जैसी गर्दन,
सूकर जैसा मुख, वन विहारी या जंगल का वास, ऐसा पुरुष चतुष्पद द्रेष्काण ।
दूसरा द्रेष्काण--मिश्र द्रेष्काण, स्त्री एवं सपं द्रेष्काण, स्त्री सिर में कमळ का फूल
धारण करती, सपं युक्त और बड़ी कठोर ककंशा, जवानी भरी, बचपन में पलास की
टहनी पकड़ कर खड़ी या पलास के पत्ते रखी हुई । एकान्त वासी ।
तीसरा द्रेष्काण--पुरुष द्रेष्काण, सपं द्रेण्काण, स्त्रियों के लिए आभूषण लाने को
समुद्र में नाव पर बंठा व्यापार करे, सर्प अंग में धर कर चलता, सोने के आभूषण
है, चपटा दुःख ।
(५) सिंह का
पहिला द्रेष्काण--पुरुष, उग्र, आयुध द्रेष्काण, सेमर के वृक्ष पर एक गीध और
एक स्याल (लड़ैया) वैठा एक कुत्ता एक मनुष्य मैले वस्त्र पहिने मां बाप से रहित होने
के वियोग से रो रहा है । यह नर द्रेष्काण, चौपाया और पक्षी हैं ।
दूसरा द्रेष्काण--घोड़े जैसा पुष्ट शरीर सिर में गुलाबी रंग के फूल धरे काळे
हिरन का चमं ओढे व कम्बल लिये। सिह के समान सहज में साध्य नहीं होता,
धर्नुधारी, नाक का अग्र भाग ऊँचा, पुराने कपड़े गुप्त वेश पुरुष द्रेष्काण सायुध,
चतुष्पद ।
तीसरा द्रेष्काण-रीक्ष के समान कुरूप मुख, बानर के समान चेष्टा करे । दाढी
बडी, लाठी फल मांस धारण किये या भक्षण किये ! सिर के केश मुडाये । पुरुष ओर
चतुष्पद द्रेष्काण, अग्नि द्रेष्काण है ।