भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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८४ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतोय-फलित खण्ड

ग्रहो की १२ अवस्था जानना भवस्था नाम अन्यमत अवस्था नाम अन्य मत ७ सभा वसति (७) आगमन ६ १ शयन (१) शयन (समा में बैठना) (छेटना) ८ आगमन (८) भोजनष्् २ उपवेशन (२) उपवेशन (आना) (बैठना) ९ भोजन (९) नृत्य ३ नेत्रपाणि (३) नेत्रपाणि (खाना) (कुछ से नेत्र ढके) १० नृत्य रिप्सा (१०) लिप्साक् ४ प्रकाशन (४) प्रकाशन (नृत्य को इच्छा) (प्रकाशित) ११ कौतुक (११) कोतुक ` ५ ग्रमनेच्छा (५) गमन (प्रसन्न चित्त) (जाने को तत्पर) १२ निद्रा (१२) निद्रा ६ गमन (६) सभावसतिक्ष (सोना) (जाना)

यहाँ ६8 चिन्ह वाले में अन्तर है। आरम्भ में जो नाम दिये हैं वे वृहत्पाराशरी और भाव कुतूहल के अनुसार हैं |

ग्रह की अवस्था जानने की रीति

जन्म नक्षत्र संख्या + इष्ट घड़ी: + लग्न = इष्टादि योग । ग्रह जिस नक्षत्र में हो उसकी संख्या में उस ग्रह के अंश का गुणा कर ग्रह के क्रम का गुणा करना उसमें उप- रोक्त इष्टादि योग जोड़कर १२ का भाग देना जो होष रहे वही यहां बताये क्रम रे; उस

ग्रह की अवस्था होगी ।

ग्रह सुर्य | चंद्र | | बुध | गुरु | शुक्र | शनि | राहु |

क्रम- ३

रीति :- जन्म नक्षत्र + इष्ट घड़ी + लून=इष्टादि योग ।

ग्रह नक्षत्र ., ग्रह अंश ., ग्रह

संख्या संख्या * क्रम + इष्टादि योग + १२ = शेष अवस्था

बृहत्पाराशरी में ग्रह अंश के स्थान में प्रह की नवांश संख्या लो है

ग्रह नक्षत्र qg नवांश , ग्रह < अर्थात्‌ संझ्या संख्या क्रम + इष्टादि योग = १२८ शेष अवस्था

यहां ग्रह स्पष्ट में जो ग्रह का अंश हो वह उपरोक्त गणित में लेना ।

उदाहरण :

n mains १३मोन१ सिंह “मिथुन८वनु š q

२५ | २२॥ २६ Í

नक्षत्र २३

+q ४ | गुरु ५ | शुक्र शनि ७राहु ८ के =१५घ

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