सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 102, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें८६ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्डं
शथन/-लग्न से पंचम घर में उच्च या स्वक्षेत्री
ग्रह हो, यदि यह पाप ग्रह युक्त या पापदृष्ट उसके पुत्र का नाश करे
हो तो, यदि शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो एक पुत्र का नाशक होता ë ।
निम्रा--वर्तमान ग्रह सप्तम भाव में हो शत्रु -तो उसकी स्त्री यदि देव से भी
ग्रह से दृष्ट हो या शत्रु ग्रह समीप हो, रक्षित हो तो मर जाती है ।
स्त्रो मारक ग्रह को कोई शुभ ग्रह की -तो एक पत्नी मर जाती हैं दूसरी
दृष्टि हो या शुभ ग्रह युक्त हो नही मरती ।
जो शुभ और अशुभ दोनों ग्रहों की -पत्नो सब समय कष्ट युवत
दृष्टि हो तो रहती है मरती नहीं ।
नित्रा--इस अवस्था में मंगल और शनि दोनों तो थोड़ी अवस्था मैं शस्त्र की
` राहु से युक्त होकर लग्नसे अष्टम घरमें चोट लग कर मृत्यु हो ।
हों कोई शुभ ग्रह इस अवस्था में लग्न से
अष्टम घर में हों और उसे कोई पाप तब भी संग्राम में शस्त्र से
ग्रह या उसका शत्र ग्रह देखता हो. मृत्यु हो ।
निद्रा या- निद्रा या शयन अवस्था में कोई
शयन शुभ ग्रह पाप ग्रह युक्त लग्न से अष्टम हो त्रु के कोप से मृत्यु
निद्रा या शयन अवस्था में कोई मरने के समय गंगा तट पर
पाप ग्रह अष्टम घर में हो उसे शुभ देह त्याग कर भगवान् की
ग्रह देखे या कोई शुभ ग्रह पास हो सायुज्य गति को पाता है अर्थात्
अष्टमेश ग्रह उसके साथहोतो ईदवरके अंगमें लीन हो जाता है।
इन अवस्थाओं का और भी शुभाशुभ विचार
( १) जन्म समय शयन अवस्था में स्थित शुभ ग्रह जिस भाव में हो उस भाव का
फल शुभ होता हे ।
(२) भोजन अवस्था में पाप ग्रह जिस भाव में हो उस भाव का फल नष्ट
होता है ।
( ३ ) निद्रा अवस्था में पाप ग्रह यदि सप्तम भाव में हो तो शुभ फल समझना
यदि उस पर पाप ग्रह की दृष्टि हो तो शुभ नहीं होता ।
(४) निद्रा या शयन अवस्था में पंचम भाव में यदि पाप ग्रह हो तो शुभ फछ ।
( ५ ) निद्रा या शयन अवस्था में पाप ग्रह अष्टम भाव में हो तो राजदण्ड आदि से
अपमृत्यु हो ।
यदि उस पर शुभ ग्रहका योग या दृष्टि हो तो उसका मरण गंगादि तीर्थं में हो
( ६ ) शयन या भोजन अवस्था में पाप ग्रह दशम माव में हो तो कमं से अनेक
प्रकारे दुःख होते हैं ।