सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 103, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंग्रहों की अवस्थाएँ और चन्द्रक्रिया : ८७
(७) चन्द्रमा कौतुक या प्रकाश अवस्था में दशम भाव में हो तो निदचय राजयोग
होता है । यहाँ चन्द्रमा उपलक्षण है अर्थात् कोई भी शुभ ग्रह या दशमेश
दशम भाव मे कौतुक या प्रकाश अवस्था में हो तो राजा या राजतुल्य
होता है ।
यहां ग्रहों की अवस्था और बल के अनुसार ग्रह से सब भावों का फल समझना ।
अब प्रत्येक ग्रहों की १२ अवस्थाओं का पृथक् पृथक् फल देते Š
(१) सूर्य की १२ अवस्थाओं का फल
9 शयन अवस्था में--मंदाग्नि ( क्षुपा की हानि ), पित्त का कोप, गुह्य भाग में रोग
(गुदा में त्रण), हृदय शूळ, हाथ पांव में स्थूलता या हाथी पांव ।
२ उपवेदन--दरिद्र, भारवाही, विवादी, हृदय कठोर, धन को नष्ट करने वाला, अच्छी
शिक्षा से रहित, सदा दूसरों की सवा में तत्पर, दस्तकारी के काम मे लग्न
परन्तु दुःखी, काला वर्ण परन्तु सुन्दर ।
3 चेत्रपाणि--सदा आनन्द युक्त, विवेकी, परोपकारी, बली, धनी, सुखो, राजा का कृपा
पात्र, अभिमानी ।
इस अवस्था में लग्न से ५-९ या १० वें घर में सूर्य हो तो सब प्रकार
का सुख हो, उत्तम फल । यदि अन्य स्थान में हो तो शरीर में द्रव्य
पदार्थ सम्बन्धी रोग से बीमार रहे क्रूर स्वभाव हो ।
४ प्रकाशन--उदार हृदय, पूर्ण धनी और गुणवान्, पुण्यवान्, बलवान्, सुरूप, सभा में
वक्ता पर क्रोधी, उपद्रवी, अनेक धर्म करने धाला, यदि लग्न से ५ या ७
घर में सूर्य हो तो दानी, मानयुक्त धनी हो आनन्द भोगे और राजकीय'
पुरुष का पुत्र हो । अन्य मत से पुत्र हानि ।
५ गमनेच्छा--विदेश वासी, दुःखी, आळसी, बुद्धि हीन, डरपोक, क्रोधी, कृपण, कुबुद्धि,
निद्रालु, उग्र, कठोर चित्त, कुपार्ग में बुद्धि, पर-स्त्रो भोगने का इच्छुक,
सर्वत्र प्रकाश करने वाला, अशुद्धता से रहने वाला ।
६ गसन--पर-स्त्री गामी, परिजन रहित ( अकेला रहने वाला ), गमन शील, ( गमन
करने वाला ) खल, मलिन, कुबुद्धि, स्त्री और पहिले पुत्र का नाश, विदेश
वास, पैर के रोग से पोड़ित इस अवस्था में सूर्य ५ या १२ घर में हो तो
पुत्र हानि करे ।
७ सभावसति--प्यारी स्त्रो मिले, सबसे मान पाये, अनेक गुण युक्त, ज्ञानवान् और सम्य
हो, परोपकारी, घन धान्य से पूर्ण, बली, मित्र का (अनेक मित्र) प्रेमी,
दयालु, कलाओं का ज्ञाता, नवीन वस्त्र, भूमि ग्रह युवत ।
८ आगमन- -शत्रुओं से तंग, चंचल, दुष्ट, दुबल, घर्म कर्महीन, मदोद्धत, (मद से उद्धत)
अज्ञानी, सदा काम H लगा रहे, मिथ्यावादी, निम्न श्रेणी की शिक्षा से
युक्त, कठोर चित्त, बुरे आचरण वाला ।