भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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ग्रहो की अवस्थाए और चन्द्र क्रिया : ९७

१० नृत्य लिप्सा-धर्मात्मा, धनी, राज मान्य, घीर, रण में वीर, सब प्रकार का सुख

भोगे, पांचवें घर में-सब पुत्र हानि, ५, ७, ९ या ११ घर में-सब गंवावे,

नाना प्रकार के रोग हों ।

११ कौतुक-रक्षा का मंत्री, दानी, धार्मिक, विद्वान्‌, पवित्र सत्र प्रकार के कार्य में बहुत

दक्ष घनी, अच्छा भोजन, भूमि और घन से परिपूर्ण अति सुखी, सुन्दर स्त्री

व सुख से पूर्ण, काव्य कला का ज्ञाता ।

१२ निद्रा -घनवान्‌, गुणवान, पराक्रमी, शत्रु को जीतने वाला, वेश्या से प्रेम, धार्मिक,

नेत्र रोगी, शूल रोग, २ स्त्री, कई सन्तान हों । १० £ घर में-नष्ट हो जाये,

सज कार्य में और धामिक कार्य में उस का जीवन असफल रहे । सदा qar,

दुःखी, रोगी, सदा विदेश वास । अन्य कोई अवस्था में १० वें घर में हो

तो उसे लाभ जनक होगी 1 शनि स्वस्थान, उच्च केन्द्र या त्रिकोण में हो तो

उपरोक्त हानि कारक बातें नहीं होंगी, ५ या ७ घर में-२ स्त्री और कई

सन्तान हो सब प्रकार का सुख भोगे ।

.८. राहु की १२ अवस्थाओं का फल

१ शयन -बहुत दुःख भोगे, रोगी रहे, हाथी पांव रोग हो, सदा घन गंवाये, राज￾कीय पुरुष से कप्ट भोगे, कन्या, सिंह या मिथुन या वृष में उन्नत शील हो

सव प्रकार का सुख भोगे । अन्यमत से मेष वृष या मिथुन में-घन धान्य

युक्त समाज में मुख्य । ( अन्यमत ) लग्न से राहु २,११ या १२ घर में हो

निर्धन होकर भ्रमण करे । राहु स्वक्षत्र ( कन्या का ) या उच्च ( मिथुन )

का या शुक्र या बुध के धर का या मित्र गृही या अपने वर्ग का शुभ ग्रह के

वर्ग का हो तो पूर्ण शुभ फल देगा उक्त स्थान छोड़ अन्य घर में हो तो

अनिष्ट फल देता ë ।

२ उपवेशन-कोढ़ से दुःख भोगे, अपने शत्रु या राजासे हानि हो । दाद रोग, घन से

रहित राज सभा में बैठने वाला, अभिमानी ।

३ ेत्रपाणि-नेत्र रोग हो, सर्प या व्याघ्र से चोट, उतावला, बातूनो, घनो, कुटिल हृदय

या घोखेबाज, स्त्री के प्रभाव में रदे, बचपन से रोगी, अंडकोष दोष युक्त,

गुप्तांग में रोग, जल में डूबने को संभावना शत्र, और चोर से भय, घनका

नाश ।

४ प्रकाशन-सुन्दर स्थान, सुयश, धन और गुणों को उन्तति, राजा से अधिकार, विदेश

में उन्नति, नवीन मेघ समान, धार्मिक, उग्र (या विदेश वास) । मिथुन या

कन्या का-शुभ आसन पर बैठने वाला भादि उपरोक्त शुभफल । यदि कर्के

या सिंह में हो तो सिर काटे जाने की संभावना हो ।