सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 114, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें९८ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
५ गमनेच्छा-बहुत पवित्र, बहुत घनी, विद्वान, गुणी, दानी ओर प्रसिद्ध-बहुत सन्तान
वाला, पंडित, राजपूज्य 1
६ गसन -दांत के चोट के निशान शरीर पर, बहुत क्रोधी, उपद्रवी, परपीड़क, निंदक,
सपं या व्याघ्र से काटा जावे, पांव में लोहे की सांकल पड़ने की ' संभावना,
कई प्रकार की बीमारी में घन नष्ट, उसकी स्त्री ओर सम्वन्धी की मृत्यु, धन
से हीन, कृपण, कामी, कुटिल ।
७ सभाबसति-बड़ा पंडित, अत्यन्त कृपण, अनेक गुणों से सम्पन्न, घन से सुखी । बुद्धि-
मान, घामिक हो । लग्न, ५ या १० घर में-अपनी स्त्री पुत्र, धन गंवाये ।
अस्थिर मन रहे ।
८ आगमन-प्रत्येक को दुःख दायक हो, कुटुम्बियो ओर सम्बन्धियों की हानि, स्वतः
कष्ट भोगे । व्याकुलता, शत्रु भय, घन का नाश, शठता और दुर्बलता,
बन्धुओं से विवाद, भृत्य वर्गो का नाशक ।
९ भोजन -भोजन बिना विकल, मंद वुद्धि; कार्यं में आलसी, स्त्री पुत्र के सुख से रहित
बहुत लालची, उपद्रवी, झगड़ाळू, कृपण, दुःखी, लग्न या १० घर में-पतित
भाग जावें चाहे वह भले कुटुम््र में हुआ हो । ७ या १० घर में-अपनी स्त्री
को अवश्य खोवे,.उसके सब कायं में बाधा हो ।
१० नृत्यलिप्सा-महारोग भय, नेत्र रोग, शत्र भय, घन और घर्म की हानि। लगन में-
कष्ट प्रद रोग से दुःख लंगड़ा या अंधा हो या पर पीड़क हो । परन्तु और
कोई घर में हो तो धनी, उन्नति शील बुद्धिमान हो, २ स्त्री ओर कई
सन्तान हो ।
११ कोतुक-स्थान हानि, पर स्त्री से प्रेम, परधन का लोभी । उन्नति प्राप्त करे और
पूर्ण हो परन्तु शूल रोग हो । ५, ७ या १० घर छोड़ कर अन्य घर में हो
तो स्त्री और सन्तान न होने से अनेक दुःख भोगे | यदि स्वस्थान या उच्च
में हो तो निश्चय पूर्वक प्रत्येक बातें लाभ जनक होंगी ।
१२ निद्रा -गुणो से युक्त, स्त्री पुत्र आदि सुख से युक्त, घोर, गौरव युक्त, महाधनवान,
गर्वीला । अन्यमत-दुःख ओर कष्ट से पुणं, गरीब, सन्तान हीन, विदेश
वासी, यदि W या ७ घर में हो तो बुद्धिमान पुत्र और अच्छी स्त्री हो, ५
या ९ में हो तो पवित्र क्षेत्र में निवास करे, ९ या १० घर में हो तो प्रसिद्ध
तीथं प्रयाग आदि में मृत्यु हो । २,१० या १२ स्थान में-गरीबी से कष्ट
भोगे, संसार भर में भ्रमण करे।
९. केतु की १२ अवस्थाओं का फल
१ शयन १, २, ३, या ६ राशि का-घनवान अन्य राशि में रोग से पीडित ।
२ उपवेशन-दाद खजुली हो, शत्रू , राजा, सर्प या चोर से भय ।