भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 167, कुल 418 में से

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फल का स्थूल विचार : १५१

मंतांतर--ग्रह की गति के अनुसार भी ररिम में संस्कार करना बताया है--

ग्रह वक्ती आरम्भन्रदिम x २

ग्रह की अंतभागनरक्मि-- किम

ग्रह वक्री मध्यभागरअनुपात से

रह्मि

१० ग्रह इंदरा तिरि

ग्रह बहुत मंद गति-- Ër

ग्रह को शीघ्र a= R — हे -

शीघ्रतर मतिरिह

राजयोग और दरिद्रयोग में रश्मियोग का विशेष संस्कार

राजयोग करनेवाले ग्रह और दरिद्रयीग करनेवाले ग्रह की रदिम को लेकर राजयोग

रदिम से दरिद्र रस्मि घटाना, जो राजयोग ग्रह की रश्मि शोष रहे बही स्पष्ट जानना । इसी

प्रकार शुभ, अशुभ, शत्रू , मित्र आदि ग्रहों या रहिम के सम्बन्ध से उपरोक्त विचार करना ।

इसी प्रकार कई इष्ट बल कष्ट बल में पृथक-पृथक ग्रह रदिम का गुणा कर इष्ट

रश्मि और कष्ट रदिम बनाकर उस पर से शुभाशुभ फल का विचार करते हैं ।

अध्याय ९

फळ का स्थूल विचार

पिछले अध्यायो में फलित विचारने के लिए किन-किन बातों का विचार करना

आवश्यक है यह बताया गया है । रदिमफळ, भावफल, प्रहफळ, दृष्टिफल आदि फल

बिचारने की अनेक बातें आगे बताई जायगीं ।

यहाँ फलित का स्थूल विचार दिया जाता है । जिसको जान लेने से फलित बिचारने

में सहायता मिळती है । यह बात ध्यान रहे कि परिस्थिति वश इस स्थूल में भो परिवर्तन

हो सकता हूँ । š

ग्रहों का मित्र, शत्रू, स्व, उच्च, नीच आदि जिस प्रकार की राशि में है वेसा विचार

कर फल कहना पड़ता है ।

१--भाव में पाप ग्रह हो-पापफल, भाव को हानि, विचारणीय विषय का नाश ।

२--भाव में पाप युक्त या पाप दृष्टनफल हानि ।

३--भाव में पाप ग्रह नीच काउ्सब फल नाश ।

४--भाव में शुभ ग्रहन्र्भावफल की वृद्धि ।

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