भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 175, कुल 418 में से

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फल का स्थूल विचार : १५९

३--यदि एक ओर शुभग्रह दूसरी ओर अशुभग्रह हो तो मिश्रफल होगा ।

२ और १२ भाव पर विचार

१--व्ययेश और धनेश अपने स्वभाव के अनुसार फल नहीं देते । ये भाव, भावेश

और राशि के अनुसार फल देते हैं ।

( अ ) जिस प्रकार शुभ या अशुभ घर में हो ।

( आ ) जिस प्रकार शुभ या अशुभ भावेश के साथ हो।

(इ) या जिस स्थान का स्वामी हो वह राशि जैसी शुभ या अशुभ हो उसी के

अनुसार शुभ या अशुभ फल देते हैं ।

अर्थात्‌ ( क ) द्वितीये के साथ जो ग्रह हो वह अपना ही फल देगा यदि वहाँ बहुत

ग्रह हों तो उनमें जो बली हो उसके अनुसार द्वितीयेश फल देगा ।

( ख ) यदि किसी ग्रह का साथ न हो तो जिस अन्य स्थान का स्वामी हो उसी के

के अनुसार फल देगा ।

( ग ) यदि वह अन्य दूसरे स्यान का स्वामी भी न हो जैसे सूर्य और चंद्र जिनका

एक ही स्वस्थान है तो हितीयेश जिस भाव में बैठा हो उसके अनुसार फल देगा ।

( घ ) यदि ये योग न हों तथा अन्य स्थान का स्वामी भी न हो और अपने स्थान

में ही हो तो वह अपने स्वभाव के अनुसार ही शुभ या अशुभ फल देगा ।

२--इसी प्रक्रार व्ययेश का फल भी विचारना ।

३-२-१२ भाव के स्वामियों का अपना कोई विशेष गुण-दोष नहीं है । ये स्वामी

जिस भाव में पड़े हों, जिस ग्रह के साथ हों, जिस भाव में पड़े हो, उस भाव का स्वामी

किस भाव में पड़ा है इन तीनों रीति से उस के गुण दोष विचारना अर्थात्‌ शुभ स्थान में

शुभ युक्त हो तो शुभ, अशुभ स्थान ( ६.८.१२ भाव ) या अशुभ ग्रह युक्त हो तो अशुभ

होता है ।

धनभाव

१--घनेश धन रखनेवाला है उसके साथ यदि पापी ( दुष्ट ) रहता है तो उसके

घन को समय पाकर नष्ट कर देता है और यदि उसके साथ शुभ अर्थात्‌ शुभावितक रहे तो

उसके धन की रक्षा करेगा इस कारण घनेश अपने साथो के अनुसार फल देता है ।

इससे द्वितीयेश अपने साथी, स्थिति और दृष्टि के अनुसार अच्छे या बुरे हो जाते gë!

२--घनेश जहाँ हो उस भाव राशि को जगह में विशेष वृद्धि करते हैं। वह राशि

जिस दिशा की है उस ओर से द्रव्यलाभ होता है । यदि वक्री हो तो सब दिशाओं में

लाभ हो । र

३--द्वितीयभाव में अच्छा ग्रह हो और हितोयेश शुम ग्रह हो तो उसकी दशा मे

उन्नति होगी । शुभ वार्ता सुनने का आनंद होता है ।

४--द्वितीयेश पापग्रह हो पापयुक्त हो तो दणा-अतर्दशा में अग्नि, शस्त्र चोर आदि

शोक के द्वारा हानि हो साधारण असुख हो ।

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