भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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१६० : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

५--द्वितीयेश पापग्रह हो तो जब उस राशि में बुरे ग्रह आवें तो उस समय जिम्मे-

दारी का काम करने से हानि होगी ।

२-७ भाव

१--२-७ घर मारक होने से अशुभ समझे जाते हैं । इन स्थानों के स्वामी मार￾केश कहलाते हैं ।

२--यह अशुभ होकर २-४ घर में हों तो अशुभ होते हैं ।

३--ग्रहो के स्वस्थान में सप्तम स्थान अशुभ समझा जाता ë । जैसे मकर का

चन्द्र । यह चन्द्र के स्वस्थान ककं से सातवाँ है !

तुतीय भाव

१--कोई भावेश पापग्रह हो तो वह लग्न से तीसरे घर में पड़ जाय तो अच्छा

फल देगा ।

२--यदि शुभ ग्रह तीसरे स्थान में पड़े तो मध्यम फल देगा जैसे नवमेश गुरु तीसरे

स्थान में हो तो गुरु शुभ होने से मध्यम फल देगा ।

चतुर्थंभाव

१--चतुर्थं और दशमभाव विशेष शुभ होते है । इनमें शुभ ग्रह अच्छे है पाष ग्रह

कुछ कष्ट देते हैँ ।

२--शुभ ग्रह उच्च या स्वक्षेत्री या चतुर्थ में हो तो पशु वाहन आदि प्राप्त हो,

चन्द्र हो तो अन्न मिले, शुक्र हो तो गाने-बजाने में रचि हो, गुरु हो तो धन याः उत्तम

बाहन प्राप्त हो ।

पाप ग्रह मंगल हो तो अग्नि भय, भूमि हानि आदि, सूयं हो तो राजभय, राहुं हो

तो बिष आदि का भय, घनहानि, शनि हो तो शरीर कष्ट हो ।

पंचमभाव

१--पंचमेश बुरे स्थान में हो तो अशुभ समझा जाता है ।

२--पंचमेश क्रूर ग्रह हो तो भी शुभ होता है !

३--पंचम घर में दशमेश हो तो सुखदायक होता है ।

४- पंचम में गुरु हो या ९-१२ राशि हो तो संतान का दुःख हो ।

षष्ठभाव

१--कोई कहते हैं कि छठे घर में, ग्रह अच्छा फल देता है, कोई कहते हैं बुरा

फल देता ë परन्तु सिद्धांत यह हैं कि--

पापग्रह किसी भाव में हो उस भाव के फल को नष्ट करते हैं या कम करते हैं और

शुभग्रह किसी भाव में हो तो उस भाव के फळ को बढ़ाते हैँ ।

२---छठा भाव रोग, ऋण, शत्रु का मुख्य स्थान है यदि पापग्रह वहाँ हो तो उस

भाव के बुरे फल को नाश करेगा अर्थात रोग शत्रु ऋण आदि नष्ट होने से अवश्य

सुख होगा ।