भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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फल का स्थूल विचार : १६१

यदि अच्छे ग्रह यहाँ हों तो उस भाव के फलको बढ़ावेंगे अर्थात्‌ रोग आदि की

वृद्धि होगी ।

3—= कई का मत है कि छठे भाव में ग्रह विरुद्ध फल देता है । इस पर

भिन्न-भिन्न मंत Š । बताया गया है कि गुरु छठे भाव में हो तो शत्रू, आदि का नाश

कर सुख देता है।

४--छठा घर उपचय भी है, अघि या वसुमती योग में छठे भाव में अच्छे ग्रह हों

तो अच्छा फल बताया है । इस प्रकार भिन्न-भिन्न मत हैं । लेखक का मत है कि अज्छे

ग्रह इस भाव में हों तो षष्ठेश होने पर अधिक लाभ नहीं करः सकते यदि कुछ अच्छा .

करेंगे तो तो अधिक रूप से नहीं ।

५--छठे भाव का स्वामी अशुभ है 1

६--यवनाचायं के मत से षष्ठेश षष्ठ में शुभ है।

७६-७ s< का स्वामी दशम में हो या दशमेश के साथ हो तो शुभ समझा

जाता है ।

६-८ घर

१--शुभ ग्रह नीच या शत्रु गृही या ६-८ घर में हो दुःखदाई होता है।

२--पाप ग्रह ऐसी स्थिति में बहुत ही दुःखदाई होते हैं।

३--मंगल या शनि अष्टम हो तो मृत्यु समीप होगी वनिस्वत गुरु के, यदि गुरु

अष्टम हो ।

४-६-८ घर में अशुभ ग्रह नीच का हो तो उसकी दशा में शत्रू या चोर से

हानि हो।

८ भाव

१--अष्टम भाव में सूर्य चन्द्र बली होते हैं ।

२--अष्टम भाव का स्वामी लग्नेश हो तो शुभ है।

अष्टमेश यह भाग्य का व्यय भाव होने से अशुभ है यदि यह लग्नेश भी हो तो

अशुभ होने पर भी शुभ हो जाता है। :

३--अष्टमेश स्वतः अष्टमेक्ष मात्र हो अर्थात वह किसी दूसरे स्थान का स्वामी न

हो तो शुभ होता है । जैसे सूर्य ओर चन्द्र जिनके एक ही स्वस्थान है । परन्तु दूसरे ग्रहों

के दो स्वस्थान होने से यहाँ बुरे माने जाते हैं ।

४--त्रिकोण शुभ माना जाता है यहाँ ९-५ भाव की अपेक्षा लग्न अल्पबली है

इससे लग्नेश हो जाने से अष्टमेश शुभ हो जाता है। यदि बह पंचमेश या नवमेश भी

हो तो और भी शुभ हो जाता है ।

५--अष्टमेश यदि त्रिषडाय अशुभ स्थान का स्वामी भी हो तो विशेष अशुभकारक

हो जाता है । ६--अष्टमेश निबॅळ होकर जहाँ रहता है उस भाव का नाश करता है ।

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