भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 178, कुल 418 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 178

१६२ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

७--अष्टमेश शुभ ग्रह के साथ हो तो शुभ हो जाता है शुभ फल देता है ।

८--जिस भाव में अष्टमेश हो उस भाव का नाश करता है, परन्तु अष्टमेश मित्र

गृही हो तो अच्छा है ।

९--बष्टमेण अष्टम हो तो यवनाचार्य के मत से शुभ होता है 1

१०--अष्टम में शुभ ग्रह हों तो अच्छा ओर दीर्घायु करते हैं ।

११--अष्टमेश ३-७ या ११ भाव का स्वामी भी हो तो विशेष अशुभ होता है ।

परन्तु त्रिकोण का स्वामी हो तो शुभ हो जाता है ।

त्रिक स्थान ६-८-१२ भाव

१--कहा है शुभ ग्रह भाव की वृद्धि करते हैं और पापग्रह हानि करते हैं परंतु ६-८-

१२ भाव में विपरीत फल होता है । छठे पापग्रह रोगादि की हानि करते हैं अष्टम हों तो

मृत्यु की हानि, व्यय में हों तो व्यय को हानि करते हैँ ऐसा सत्याचार्य का मत है ।

ग्रह वल देख कर फल विचारना कहा है, शुभ ग्रह उस भाव के फल को बढ़ाते हैं, पाप

ग्रह नष्ट करते हैं ओर मिश्र ग्रह मिश्रित फल करते हैं. परन्तु यहाँ बिपरीत फल होता है -

इससे त्रिक में शुभग्रह अनिष्ट कारक बताया है ।

२--जिस भाव का स्वामी त्रिक में हो उस भाव के अच्छे फल को बुरा

करता है और बुरे फल को अच्छा करता है । ग्रह बलहीन हो तो बहुत हानि करता

है बली हो तो अल्प हानि करता है ।

३--जिस भाव का स्वामी त्रिक में हो या त्रिकेश जिस भाव में हो उप्त भाव का

फल नाश करता है परन्तु उसे शुभ ग्रह देखता हो तो शुभ हो जाता है ।

४--नीच ग्रह अशुभ ग्रह के साथ त्रिक में हो तो महादुःखदाई होता है ।

५---ब्रिक में उच्च के ग्रह का अच्छा फल नहीं होता ।

६--सब भावों से गिनने पर ६-८-१२ भाव में पापग्रह अशुभफल देते हैं । परम्तु

शुभग्रह शुभफल महीं देते । परन्तु इन भावों में शुभग्रह अशुभ फल भी नहीं होने देते ।

इस प्रकार प्रत्येक भाव से विचारना ।

७--लग्न से ६-८-१२ भाव में अच्छे ग्रह हों या इनके स्वामी हों तो बहुत अच्छा

फल नहीं देते ।

८--भावेश जिस भाव में हो उस भाव का स्वामी fs में हो तो उस भाव को

निबेल बना देता है परन्तु ग्रह उच्च का, मिंत्रगृही या स्वगृही हो तो वह भाव कुछ

बलवान्‌ हो जाता है ।

९--भावेद पापयुक्त होकर त्रिक स्थान, शाच्रुस्थान या नीच में हो तो उस भाव की

हानि होती है 1

१०--६-८-१२ के भावेशों को छोड़कर अन्य भाव के स्वामी छरन से केन्द्र या

त्रिकोण में हों तो शुभ होता है ।

११--त्रिकेश केन्द्र या त्रिकोण में हों तो भी अच्छा फल नहीं देते ।