सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 179, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंफल का स्थल विचार : १६३
१२--इसी प्रकार दूसरे भावों का फल ग्रह के समान त्रिकोण केन्द्र आदि का विचार
ह और यह देखकर कहना चाहिये कि उस भाव का स्वामी वहाँ से त्रिक में तो
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१३--कोई ग्रह अपने स्वस्थान में हो और उसका दूसरा भी स्थान हो जो दुष्टमाव
में पड़ता होतो यह.दुष्ट स्थान का भी स्वामी कहलायेगा । परन्तु दुष्ट स्थान का फल न
देगा अपने ही स्थान का फल देगा जहाँ पर कि वह है । जैसे पंचम में मकर का शनि
स्वस्थानी है यही छठे कुंभ का स्वामी होने से षष्ठ स्थान का हामि कारक फल न देगा ।
१४--त्रिकेश त्रिक में हो तो देह सुख न होगा | षष्ठेश षष्ठ में हो तो रोग या
दात्रु से रहित होकर सुखी होगा परन्तु कृपण होगा । अष्टमेश अष्टम में हो तो बहुत
व्याधि रहित तो होगा परन्तु वह परिश्रमी न होकर फरदी होगा ।
१५--लग्न को देखने वाला, लग्नेश और लरनस्थ ग्रह में तोनों त्रिक स्थान के
स्वामी हों, शत्रगृही हों या निर्बल हों तो ये ग्रह अपनी दशा में लग्न के फल को नहीं
देते हैं ।
८-१२ भाव
१--८-१२ भाव से सब तरह के पाप व क्लेश का विचार होता है ।
२--किसी भाव से ८ या १२ घर के स्वामी की राशि या नवांश में जब शनि
गोचर में पहुँचता है तब उसका फल बिलकुल नाश हो जाता है ।
३००इन तीनों स्वामियों के त्रिकोण में जो राशि हो उस राशि में जब शनि गोचर
में जावे तब यह फल होता है ।
नवम भाव
१--नवम भाव से भाग्य का विचार होता है 1
२--नवम की राणि या वर्ग में जैसे शुभाशुभ बली या निबॅल ग्रह हों या नवांश
जैसा शुभस्थान में बली या निर्बल हो वैसा भारथ शुभ मध्यम या भाग्यहानि समझना ।
दशम भाव
१--दशमेश का सम्बन्ध नवम पंचम घर से हो तो राजयोग होता है ।
२--दशमेश, नवमेश स्वगृही हो तो शुभ है ओर राजयोग कारक हो जाता है ।
(३) दशमेश या किसी त्रिकोणेश में शुभ सम्बन्ध अच्छा होता हैं ।
( ४ ) दशमेश नवम में नवमेश दशम में हो तो बहुत शुभ होता है ।
एकादशभाव
(१ ) लाभभाव से सब वस्तुओं के मिलने का विचार होता है
( २ ) एकादशमाव में प्रायः सभी ग्रह शुभ फळदायक हैं, अच्छे या बुरे ग्रह सब
लाभभाव में अच्छा फल देते हैं ।
(३) सूर्य इस भाव में बलवान होता है सब भय दुर करता है |