सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 180, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें१६४ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
व्ययभाव
( १ ) बारहवें भाव में अशुभग्रह हो तो उस ग्रह की दशा अशुभ होती है ।
( २) व्ययेश व्यय में हो तो यवनाचार्य के मत से शुभ होता है 1
(३) अधिक व्यय करने वालों के साथ भले या दुष्ट पुरुष लग जाते हैं और स्थान
एवं वंश के अनुसार खचे कराते हैं इसी प्रकार व्ययेश के साथ शुभ या अशुभग्रह जिस
प्रकार रहते हैं या जिसके अनुसार स्थान का स्वामी होकर जैसे स्थान में हो उसी के
अनुसार शुभ या अशुभ कार्य में खर्च कराते हैं 1
किसी भी भाव से उसके व्ययभाव की स्थिति
( १ ) लग्नेश यह द्वितीय ( घन ) भाव का व्ययेश होने से यदि शरीर रक्षा के
निमित्त घन खर्च करता है तो लग्नेश शुभ ही हुआ ।
( २) द्वितीयेश यह सहजभाव का व्ययेश हुआ । इस भाव से पराक्रम तथा आयु
का विचार होने से इनका व्ययकारक द्वितीयेश होने से अशुभ हुआ 1 यह आयुक्षीण करने
के कारण मारकेश कहलाया ।
( ३ ) तृतीयेश् यह सुखभाव का व्ययेश हुआ । सुख का व्यय करने के कारण
तृ तीये अशुभ हुआ ।
( ४ ) चतुर्थेश यह विद्या या पुत्र स्थान का व्ययेश हुआ । यदि अच्छा पुरुष अर्थात्
शुभ होकर विद्या का नाश करता है तो अति अनुचित है । यदि पापी होकर अपने स्वभाव के अनुसार विद्या का नाश करता है तो दुष्ट के विचार से उसका कायं उचित ही
Ë 1 इस कारण शुभग्रह चतुर्थश हो जाय तो अशुभ है चतुर्थेश पापग्रह हो तो अपने
स्वभाव के अनुसार उचित करता है । इससे चतुर्थेश पापग्रह शुभ होता है 1
( ५ ) पंचमेश रिपुभाव का व्ययेश है अत. शत्रु या रोग का नाशक होने से अच्छा
हुआ। `
(६) षष्ठेश यह जायाभाव का व्ययेश है अतः स्त्री का नाशक होने से अशुभ
हुआ ।
( ७ ) सप्तमेश यह आयु भाव का व्ययकारक है अतः आयु का नाशक हुआ इससे
सप्तमेश मारकेश कहलाया ।
( ८ ) अष्टमेश यह धमं या भाग्य भाव का व्ययेश होने के कारण अशुभ हुआ ।
4 ९ ) नवमेश यह कर्मभाव का व्ययकारक होने से शुभ हुआ क्योंकि कर्म अर्थात्
सांसारिक बन्धनों का वह मारक हुआ ।
(१०) दशमेश यह लाभ का व्ययेश होने के कारण अशुभ हुआ क्योंकि लाम की
हानि अनुचित है । दशमेश पापग्रह हो तो इच्छित पापफल की प्राप्ति का नष्ट करने
वाला हुआ इससे अपने कतंव्य के अनुसार शुभ माना जाता है ।
(११) लामेश यह व्यय स्थान का व्ययेश है । खर्च न होने देने से आवश्यक सामग्री
प्राप्त करना कठिन होगा इससे यह अशुभ माना जाता है 1