भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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फल का स्थूल[विचार : १६७

तो और भी भणुम हो जाते हैं । स्वामाविक शुभग्रह केन्द्रेश होने पर शुभफल नहीं देते और

स्वाभाविक पापग्रह केन्द्रेश होने पर पापफल नहीं देते । ये सब पाप और शुभग्रह त्रिकोणेश

होने पर शुभफल देते है ।

  • (६) लग केन्द्र और त्रिकोण दोनों कहलाता है इससे वह शुभ स्थान होने से

उसका स्वामी शुभ है ।

(७ ) केन्द्र में ग्रहों का साधारण फल

सूर्य हो «राजा की सेवा करने वाला । गुरु = दिव्य बुद्धि, अपने अनुष्ठान में तत्पर ।

चन्द्र हो = बैश्य की सेवा करने वाला । शुक्र = विद्या और घन से युक्त ।

मंगल हो--वस्त्र का व्यापारी आदि 1 शनिन्तीच की सेवा करने वाला ।

बुघ होम्अध्यापक ।

त्रिकोणेश

(१) त्रिक्रोग में लग्न भो गिनो जाती है केवळ ५-९ भाव नहीं ।

(२) १-५-९ भाव क्रम से उत्तरोत्तर बली हैं । पंचमेश अधिक फल देता ë |

(३) त्रिकोण के ५-९ भाव का स्वामी शुभ या पाप ग्रह जो भी हो सदा णुभ

होता है ।

(४) त्रिकोण में उच्च ग्रह हों तो घनवान्‌ होगा, नीच का प्रह हो तो बुरा

फल देगा ।

(५ ) ४-१० भाव विशेष शुभदायक हैं ५-९ भाव विशेष धन दायक हैँ ।

( ३ ) ५-९ भाव के स्वामी के साथ शुभ योग होने पर आकस्मिक घन जैसे लाटरी

आदि प्राप्त होती है ।

( ७ ) त्रिकोण के स्वामी केन्द्र या त्रिकोण में हों तो शुभ हैं एक दुसरे की सहायता

करेंगे ।

( ८) त्रिकोणेश केन्द्रेश के साथ हों तो अच्छा है यदि दुसरे त्रिकोण के स्वामी के

साथ मो केन्द्रेश का सम्बन्ध हो तो और भी अच्छा है ।

( ९) त्रिकोण का लग्नेश या चतुर्थेश से शुभ सम्बन्ध अच्छा होता है ।

( १० ) केन्द्रेश का शुभफल परिश्रम से होता है परन्तु त्रिकोणेश का शुभफल बिना

परिश्रम के होता ë 1:

( ११ ) त्रिकोणेश या केन्द्रेश ६-८-१२ घर में हों तो अपने सम्बन्ध वाले स्थान

में अशुभ प्रभाव डालते हैं ।

( १२ ) ६-८-१२ के भावेश को छोड़कर अन्य भावेश लग्न से केन्द्र या त्रिकोण में

हों तो उस भाव के लिए शुभ है ।

( १३ ) कोई भावेद् अपने भाव से त्रिकोण या केन्द्र में पड़े तो शुभ है ।

( १७४ ) पंचमेश नवमेश में शुभ सम्बन्ध हो तो प्रताप को वृद्धि हो, भाग्योदय हो ।

( १५ ) केन्द्र या त्रिकोण के स्वामी से शुभ सम्बन्ध रखनेवाला ग्रह शुभ होता है।