सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 200, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें१८४: ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
(अ) शुभ सम्बन्ध हो तो णुभफल, अशुभ सम्बन्ध हो या शत्रुता हो तो अशुभ फ
होता है ।
(ब) इन दोनों में कोई सम्बन्ध न हो तो नाम मात्र को फल होता है ।
(स) दोनों बली और शुभग्रह हों तो उत्तम फल होगा। यदि दोनों qaa भौर
निबॅल हों तो अशुभफल होगा 1
(द) यदि दोनों स्वामियों में एक बली दूसरा निर्बल या एक शुभ दूसरा अशुभ
स्थान का स्वामी हो तो मिश्रित फल होगा ।
३३--भावेश भाव स्थान में होने पर भी बल में हीन हो और कूरग्रह या शत्रुग्रह
की अंतर्दशा हो तो बुरा फल होता है ।
३४--या भावेश भाव में हो और बलवान् हो तो भी कूर या T.G की अंतर्दशा
में अशुभफल देगा ।
३५--शीर्षोदय राशि में ग्रहदशा के आरम्म में, पुष्ठोदय राशि में दशा के अन्त में
और उभयोदय राशि में दशा में सदाफल देते हैं ।
३६--मध्यादशा--त्रिक या उच्चग्रह की दशा कहलाती है।
अघमा दशा--जो अपने नीच या wm में हो या नवांश में शन्न या
नीच राशि में हो उसकी दशा ।
छिद्रादशा--जन्मकालीन शत्रू, या नीचगत बलवान् ग्रह की अंतदंशा छिद्रा-
दशां कहलाती है। 2
भाव का फल कब होगा इसका अन्य प्रकार से विचार
( १ ) लग्नेश से विचार -लग्नेश जब गोचर में उस सम्बन्धित भाव का स्वामी
जहाँ हो उस राशि या अंश के त्रिकोण में जो राशि आवे उसी राशि में जब लग्न हो 1
( २) भावेश से विचार--छग्नेश जिस राशि या अंश में हो उसके त्रिकोण में
जो राशि हो उस पर गोचर में जब उस भाव का स्वामी आवे ।
(३) कारक से विचार--दोनों स्वामी अर्थात् भाव और लग्न का स्वामी एक
दूसरे के साथ हों या दृष्टि योग करें।
या जब उस विचारणीय भाव का कारक गोचर में छनन या चंद्र की राशि फा हो
उसके स्वामी के साथ आ जावे ।
(४) अच्छे फल का समय--जिस भाव का विचार करना है उस भाव का
स्वामी जहां हो उसको राशि या अंश खोजो, जब ग्रह गोचर में उस राशि या अंश के
त्रिकोण में आवे तो उस भाव का अच्छा फल प्रगट होगा ।
(५ ) शत्रु--जब लग्नेश ओर षष्ठेश गोचर में साथ पड़े और यह बष्ठेश लग्नेश
से बळ में कम हो तब उसके शत्रू उसके आधीन होंगे । नहों तो विपरीत फल होगा अर्थात्
चष्ठेश बली हो तो विरुद्ध फल होगा ।
(६ ) द्वेष--यदि भाव स्वामी और लग्नेश के बीच शत्रुता हो, जो नैसगिक या