सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 199, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंफल का स्थूल विचार : १८३
१७--राजयोग कारक शुभग्रह का सम्बन्ध किसी शुभग्रह से हो तो राजकारक ग्रह की दक्षा में शुभग्रह की अतर्देशा होने पर उस समय राजयोग का शुभफल प्राप्त होता है ।
१८--राजयोग कारक में कोई अशुभयोग बाघक न हो तो उसका शुभफल होगा
अन्यथा नहीं होगा । अर्थात् राजयोग कारक ग्रह दोष रहित हो अस्त वक्री नीच आदि
न हो और उससे सम्बन्ध रखने वाले ग्रहों में भी ये दोष न हों वो शुभफल होता है ।
१९--प्रत्येक भाव के भावेश का जो शत्रु हो या ग्रह जो ऐसे घर में हो जहाँ
अष्टक वर्ग में शुभ रेखा न हो तो उस ग्रह की दशा में उस भाव के फल की हानि होती है 1
२०--महादशा स्वामी केन्द्रेश होकर शुभग्रह हो तो उसकी अंतदंशा साधारण
होगी ।
२१--महादशा स्वामी १-४-१० भाव का स्वामी हो और वह अशुभग्रह हो तो
उस ग्रह की अंतर्दशा में शुभफल होगा ।
२२--त्रिकोण स्वामी की अंतर्दशा आने पर त्रिकोणेश अशुभ भी हो तो शुभ
फल होगा ।
, २३--लग्नेश और दशमेश में नैसगिक मित्रता हो तो राजयोग कारक हो जाता
है । एक दूसरे के अंतर में राजयोग का शुभफल होता है ।
२४--लग्नेश और चतुर्थेश का सम्बन्ध राजयोग कारक होता है। जिसकी दशा
अंतदंशा शुभ हे ।
५--व्ययभाव का स्वामी शुभग्रह हो तो उसकी अतर्दशा में अशुभफल होता है 1
२६--यदि व्ययेश शुभग्रह हो और महादशा के स्वामी से उत्तम सम्बन्ध हो तो
अंतर्दशा में अच्छा फल देता है ।
२७--द्वितीय भाव का स्वामी शुभग्रह हो और महादशा के स्वामो से उसका अच्छा
सम्बन्ध हो तो धनेश की अंतदंशा शुभ होगी। `
२८--इसके विरुद्ध यदि महादशापति शुभग्रह होकर केन्द्रेश हो ओर द्वितीयेश शुभग्रह का अन्तर हो तो अंतदंशा में उसका अशुभ फल होता है ।
२९---इस प्रचार लग्नेश, महादशा या अंतर्दशा का स्वामी, वर्षदशा का स्वामी,
प्रदनलरनत का स्वामी और उससे चतुर्थ या दशम स्थान का स्वामी यदि शुभग्रह हो तो
उसका प्रभाव अशुभ पड़ता हे । यदि इन पर शुमग्रह की दृष्टि हो तो अच्छा प्रभाव
पड़ता है ।
३०--६, ८, १२, ११ घर के स्वामी को दशा कष्टप्रद होती है ।
३१--तृतीयेश व और ग्रह जो तृतीय में हो अष्टम घर को देखता हो या २२ वें
द्रेष्काण का स्वामो हो, मांदि जिस घर में हो उस राशि का स्वामी हो और राहु जब
६-८-१२ घर में हो तो ये ग्रह अपनी दशा में उस भाव के फल को नाश करते है ।
यह नवांश कुंडली से भी विचारना ।
३२--महादशा और अंतर्दशा के स्वामियो में--