सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंफल का स्थूल विचार : १८७
(६) आरोही ग्रह (चढ़ाव)--जो ग्रह अपनी परम नीच स्थिति को पार कर जब उच्च की ओर बढ्ने लगता है वह आरोही š!
भाव के विचार से ग्रह जब आरम्भ सग्धि से भाव मध्य तक हो तो वह भारोही, पश्चात् अवरोही हो जाता है ।
(७) अवरोही ग्रह (उतार) - ग्रह जब अपने परम उच्च को पार कर नीच की ओर बढ्ने लगता है अर्थात् ऊंची स्थिति से उतर कर जब वह नीचे की ओर जाने लगता है |
(८) वर्गोत्तम-किसी राविमें ग्रह हो उसका नवांश निकालने पर नवांश में भी उसी राशि में वह ग्रह आ जाये । इस प्रकार राशि और नवांश दोनों में एक सा होने पर वर्गोत्तम कहेंगे । जैसे मेष का सूर्य है यदि नवांश में भी मेष राशि में सुयं आ जाये तो कहेँगे सूर्य वर्गोत्तम में है ।
(९) शुभ वगं--वगंकुंडली में कोई ग्रह मूलत्रिकोण स्वगृही उच्च या मित्रगृही आदि हो या केन्द्र त्रिकोण में या वर्गोत्तम हो या शुभ ग्रहों के वर्ग में हो तो शुभ हूँ । (१०) उत्तमांश--नवांश सप्तांश आदि में स्वअंशक में ग्रह हो या उपरोक्त प्रकार से वगं कुंडली में परमोच्च स्वगृही आदि में ग्रह हो ।
(११) षडवर्ग शुद्धि-षडवर्ग ( लग्न कुडली, होरा कुंडली, द्रेष्काण, नवमांश, द्वादशांश और त्रिशांश ) में जो राशि है, अंश में अर्थात् वर्ग में वही राशि हो । जैसे qq राशि में वृष का नवांश हो इत्यादि प्रकार से प्रत्येक वर्ग में विचारना सूयं चन्द्र का त्रिज्ञांश नहीं होता । और भौमादि ताराग्रहो का होरा नही होता । इस तरह सब ग्रहों की षडवगं शुद्धि नहीं हो सकती केवल ५ वर्ग ही शुद्ध हो सकते हूँ ।
(१२) शुभ पष्ठ्य श--वगं के पष्ठ्य श में प्रत्येक षष्ठयंश के नाम दिये हैं जिनमें कोई शुभ है कोई नणुभ है ।
मर्त्यांश, देव लोकांश, किन्नरांश, आदि शुभ हैं ।
( १३ ) अशुभ (क्रूर) षष्ठ्यंश-घोर, राक्षस, अग्नि, पात, प्रेत, पुरीषांश, काला-
द्वयांश आदि क्रूर हैं ।
( १४ ) अच्छे या बुरे घर-गुरु शुक्र के घर लाभजनक हैं शुभ हैं । बुध का घर
उसके साथी के अनुसार कमी अच्छा कभी बुरा हो जाता है। चंद्र का घर जब चंद्र पुर्णबली हो तो शुभ होता है निर्बल होने पर अशुभ होता है और पाप ग्रह के घर बुरे
होते हैं । भाव के सम्बन्ध से अच्छे बुरे भाव पहिले बता चुके है ।
१५--शुम फल होगा इसका व्यापक अर्थ-- z
शरीर आरोग्य, घन वुद्धि, शत्रु पर विजय, स्त्री व संतान सुख, शरीर सुख, वाहन
सुख, भाग्योदय, राज्यप्राप्ति, मनोत्कर्ष, विद्याविषयक उन्नति, नवीन योजना इत्यादि शुभ
बातें ग्रह परिस्थिति वश भाव के सम्बन्ध से विचारना ।
(१६) अशुभ फल--उपरोक्त के विपरीत बुरे फल कष्ट, धन हानि, मानसिक दुःख,