सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय १०
निषेक अध्याय
गर्भाधान कुण्डली--घामिक रीति से गर्भाधान हुआ हो उसकी जो कुण्डली बनाई जावे वह आधान-कुण्डली या गभं कुण्डली हुई ।
आधान छग्न--स्त्री की वह लर्न, जब गर्भ संभव हो, उसे आधान लग्न कहते हैं ।
आघान समंय--गर्भाघान का ठीक समय न ज्ञात हो तो प्रश्न लग्न से या जन्म लग्न
गे फलादेश करे। यदि गर्भाधान समय ज्ञात हो तो उस समय जो लग्न हो उससे जातक कुण्डली बना लेवे । उस समय की नवांश कुण्डली भो बना लेवे । मासिक धमं होने पर गर्भ-स्थापनकर्त्ता ग्रह
चन्द्र और मंगल ये दोनों ग्रह स्त्री के उदर में गर्भस्थापन के कारण है À गर्भ-योग :
(१) आघान या प्रश्न लग्न में सूरं शुक्र मंगल अपने-अपने नवांशों में हों तो अवश्य ही गर्भ रहे ।
(२) ये सब ग्रह ऐसे नहीं हैं तो भी पुरुष को राशि में उपचय में बली सूर्य शुक्र
अपने-अपने गृह या नवांश में हों तो गर्भ संभव होगा ।
(३) स्त्री के उपचय में मंगल चंद्र अपने-अपने नवांश में हो तो गर्भ संभव है |
(४) गुरु लग्न नवम या पंचम में हो तो भी ।
(५) स्त्री के उपचय में चंद्र या मंगल से दुष्ट हो तब गर्भ संभव है।
(६) पुरुष के उपचय में चन्द्रमा को गुरु देखे तो गर्भ संभव है ।
गर्भपुष्ट या सुखी होने का योग
(१) चंद्र के साथ या लग्न में शुभ ग्रह हों (२) लगन और चंद्र एकत्र हों उनसे युक्त
शुभ ग्रह हो (३) लग्न या चंद्र से ९, ५, ७, २, ४, १० स्थानों में शुभ ग्रह हों ३-११
स्थान में पाप ग्रह हों 1 लग्न या चन्द्र सूर्य से दृष्ट हों ।
जन्म कुण्डली द्वारा गर्भ संभव योग
(१) स्त्री की जन्म राशि से १, २, ५, ७, ८, ९, १२ स्थानों में कहीं चंद्र हो तो
प्रत्येक मास स्त्री को मासिक घमं होता है ।
(२) उपरोक्त नियम से मासिक होने पर उस चंद्र पर मंगल की v, ८ या ७वीं
स्थान की (पुणं दृष्टि) हो तो उस समय स्त्री गर्भधारण योग्य होती हूँ। मंगल की दृष्टि
न हो तो गर्भ नहीं हो सकता ।
(३) मासिक होने पर उपरोक्त बातें होने पर जन्मराशि से २-६-१०-११ इन