भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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१९० : ज्योतिष-शिक्षा, qata फलित खण्ड

केतु वृदिचिक तृषचिक २०० ३-७-११ वृश्चिक ३९-९० ६९-४०!

४-८-१२ ,, १३९-२०१ १६००४०'

इस प्रकार अंशों के विचार से जो ग्रह की राशि का अंश है वह अंश परमोच्च

समझा जा सकता है । परन्तु जो उच्च नवांश इम प्रकार प्राप्त हो उस उच्च नवांश की

प्राप्त राशि क्रा ही अंश का विचार कैसे हो सकता है । क्योंकि एक नवाँश ३१-२०? का

ही होता है उसपें परमोच्च के अंदा उस नवाँश राशि में कैसे प्रकट होंगे ।

(२७) ग्रन्थ में वर्णित शब्दों का आधुनिक काल देश आदि विचार कर उसका

अधे विचारना । जैसे भारतवर्ष में राजा नहीं है इत्यादि पर विचार ।

राजा--कोई श्रेष्ठ अधिकारी या श्रेष्ठ माननीय पुरुष ।

राज्य--श्रेष्ठ अधिकारो के नियन्त्रण का विस्तार 1

मंत्र--मंत्रशास्त्र के अतिरिक्त वर्तमान में सलाह वा मार्गदर्शन ।

राजकीय चिन्ह युक्त--अधिकार से सम्बन्ध रखने वाला डेरा-ड्रेश तगमा, अधिकार

पत्र, श्रेष्ठ आसन, श्रेष्ठ वाहन, श्रेष्ठ स्थान आदि ।

धनुविद्या--सब प्रकार के अस्त्र-शस्त्र 1

राजकुल में उत्पन्न -श्रेष्ठ अधिकारी या माननीय पुरुष के यहाँ जन्मा हुआ ।

छत्रचामर आदि डुले--राजकीय सम्मान प्राप्त हो । '

इन्द्र पद- श्रेष्ठ अधिकार ।

राज कोप से नेत्र-हाथ-पैर आदि हानि-आज-कल यह दण्ड भारत में नहीं दिया

जाता जनता क्रोधित होकर कानून अपने हाथ में लेकर इस प्रकार दण्ड देवे या आपरेसन

आदि से हानि हो ।

मुद्रंश या पारावतांश में--अध्याय २१ में षड्वगं दिया है उसमें दशवगं के गोपुर

सिंहासन, पारावत देवलोक वैदोषिकांग आदि दिये हैं और षष्ठं में शुभ मुद्रंश, सुर्घांदा,

अमृतांश, कुबेरांश आदि दिये हैं क्रूर षष्ठ्यंशा में घोरांश, गरलांश, कालांदा आदि दिये हैं

उनसे विचार लेना ।

प्रयाग आदि तीर्थ--जातक के मन अनुसार पवित्र भूमि ।

गंगा स्नान--जातक के मन अनुसार कोई पवित्र या श्रेष्ठ नदी में स्नान 1

चेद शास्त्र पुराण--जातक के मन अनुसार धामिक या श्रेष्ठ भावना उत्पादक ग्रंथ ।

देव ब्राह्मण भक्ति--जातक के मन अनुसार श्रेष्ठ व्यक्तियों का आदर करने वाला ।

या उनकी आज्ञा पर चलने वाला या उस वर्ग के संत महात्मा आदि ।

देव दोष--अपने कार्यों के परिणाम स्वरूप अज्ञात शक्ति से हानि आदि ।

भूत-प्रेत बाघा- अज्ञात शक्तियों द्वारा मानसिक शक्तियों पर बुरा प्रभाव ।

स्त्री--जातक स्त्रो हो तो स्त्री के स्थान में उसका पति समझा जाये qaq के गुप्तांग

के वर्णन में स्त्री का गुप्तांग समझा जावे जैसा कि कालांग में विचार होता है 1

इसी प्रकार अपनी बुद्धि से शब्दों का अथं समय के अनुसार करना चाहिये ।