सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंफल का स्थूल विचार : १८९४
(२३) त्रिकोण योग--जब दो भावेश एक दुसरे के त्रिकोण में हो-- केन्द्र योग--जब दो भावेश एक दूसरे केन्द्र में हों । तृतीयैकादश योग--जब भावेश एक दुसरे से ३ और ११ भाव में हों। दिर्दादश योग--जब भावेश एक दूसरे से २ और १२ भाव में हों । षडष्टक योग--जव भावेश एक दूसरे से ६ और ८ भाव में gi! भावेश दृष्टि योग--जब दो या अधिक भावेश एक दूसरे को पूर्ण दृष्टि से देखते हों अर्थात् इनकी परस्पर दृष्टि हो ।
(२४) कारकांश--फल निर्णय के लिए ग्रहों का कारकत्व दिया हे। इसके लिये होरा, द्रेष्काण, नवमांश, आदि कई प्रकार की वर्ग कुण्डलिया बनाकर किसी विशेष वर्ग कुण्डली से किसी विशेष फल का विचार होता है । जैसे पत्नी का विचार नवांश कुण्डली से, विद्या का विचार चतुविश्ांश कुण्डली से, पुत्र का विचार सप्तमांश से, सम्पदा का विचार होरा से, भाइयों का विचार द्रेष्काण से, भाग्य का विचार चतुर्थांश कुण्डली से इत्यादि ।
(२५) राशि मास--सूर्य मास = एक राशि में सूर्य का समय = राशि मास ë! राशि वर्ष--गुरु वर्ष = एक राशि में गुरु का समय = राशि वर्ष ë । (२६) परमोच्च नवांश पर विचार--प्रह यदि इन राशियों में हो और परमोच्च के अंश के भीतर हो तो परमोच्च नवांश में हो सकता है ऐसा किसी का विचार है ।
परमोच्च अंश के स्पष्टीकरण का चक्र
ग्रह उच्च परमोच्च राशियों का नवांशकी अंशसे अंश तक
राशि राशि-अंश नवांश राशि
सुये मेष मेष १०१ १-५-९ मेष ०१० ३०-२० चंद्र वृष वृष ३९ ० » २०१० ३९८०
मंगल मकर मकर २८° २-६-१ मकर ०°-०' ३९-२०
३-७-११ » १००० १३९0-२०"
४-८-११ १, २०१० २३0९-२०
बुघ कन्या कन्या १५१ ४-८-१२ कन्या ६0-४० १००-०'
गुरु कर्के कर्क ५° ४-८-१२ ककं ०-० ३0-९०
शुक्र मीन मीन २७° २-६-१० मीन ६१-४० १९०0-९०
जं ३-७-११ ,, १६९-४० २०९-०
` ५-९-१२ ,, २६१०-४० ३०१०
शनि तुला तुला २०° ३-७-११ तुला २००० ३९-२०
४-८-१२ ,, १०९-० १३९०-२०?
००' १-५-९ ३९-२० ६९-४०?
राहु वृष वृष २ २-६-१ ड N १ ३९.२०! १६०-४०'