भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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निषेक अध्याय : १९३

चौथी रात्रि का निषेक=अल्पायु १० वीं रात्ि=प्रभावशाली पुत्र पांचवीं .,,. ,,=कन्या ११ ,, =कुरूप कन्या ' छठी ४ १7 . विशकर्ता पुत्र १२ ,, भाग्यशाली पुत्र सातवीं ,, .प्वंष्या स्त्री १३ ,, त्पापिनी कन्या आठवीं ल मन्यु १४ ,, =वर्मात्मा पुत्र नवीं ,, ,,=सुन्दर कन्या १५ ,, स्लक्ष्मी वमो कन्या : १६ , =सवंज्ञ पुत्र रज विचार व रजका रंग

अष्टमेश अष्टम में बलवान्‌ हो तो गभं दाता उत्तम रज हो-- अष्टम में सूय॑-धूम्र रंग का रज गुरुमजीठ के रंग जैसा रज का रंग चन्द्र=्श्वेत ,, s= ` ,, मंगलन्लाल ,, शनिल्काला i बुधन्अनेक वणं ,, राहु-जल के समान ,, सूर्य मंगल से=्गरम रज, अन्य ग्रहों सेस्शीत रज ।

अष्टम में कोई ग्रह न हो तो रज का रंग स्वाभाविक हो जहाँ पाप राशि होतो बहुत रज होवे । अष्टम में राहु हो तो दिन रात पीड़ा करने वाला हो, कटि में वात कारक रज हो ।

दिन रात्रि के विचार से आधान किसका शुभ होगा

शुभ प्रद ग्रह सूयं शनि चन्द्र शुक्र

राशि विषम सम विषमं सम विषम सम विषम सम

१ दिन के आधार में पिता माता काका मोसी काका मौसी पिता माता

२ रात के आधार में काका मौसी पिता माता पिता माता काका मौसी

उक्त राशि व दिन रात के बताये के विपरात होने से शुभा-शुभ फल भी उल्टा होता

है । आधान लग्न दिन-रात में जो हो उससे या मां को राशि से सम राशि, पिता की

राशि से विषम राशि हो उससे उपरोक्त फल विचारना कि किसको शुभ होगा ।

उपरोक्त मातु पितु आदि संज्ञक ग्रह कहे हैं उनका शुभाशुभ फल

प्रथम द्रेष्काण में मध्य द्रेष्काण में तीसरे द्रेष्काण में एसो कल्पना करना

पूणे फल मध्यम तुच्छ फल

जो योग पाप ग्रह कृत हैं पाप फल देते हैं । शुभ कृत हैं या शुभ ग्रहों से युक्त या

हैं वे शुभ फल देते हैं । मिश्रित से मिश्रित फल होता है ।

गर्भ के अधिपति ग्रहों का भावानुसार प्रभाव

गर्भ के :० मास के क्रमशः ये अधिपति होते हैं —

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