सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१९४ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
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अधिपति ग्रह शुक्र. मंगल. गुरु, सूर्य. चन्द्र, शनि, बुध. लग्नेश चन्द्र सूर्य
जिस महीने का स्वामी निर्बल हो उस मास में गभं को पोड़ा होती है ।
जिस महीने का स्वामी पीड़ित है उस मास में गर्भपात होना संभव है ।
४ ४ वीर्यवान् ( बलवान् ) हो ,, गर्भ पुष्टि
,,' बलवान् तथा उच्च काहो गरं की वृद्धि
र » होन वीर्य, अस्तगत, नोचगत, पाप युक्त हो तो गर्भपात हो
गर्भ वृद्धि क्रम और गर्भ मास स्वामी
मास स्वामी वृद्धि क्रम
अथम शुक्र करलल--णुक्र रज मिलकर वीयं जपता ë ।
मंगल घन--दोनों जमकर पिंड वनता ë ।
गुरु पिंड के अंकुर अर्थात् हाथ पैर मुंह निकलते हैं ( अवयव बनते हैं.) ।
सूयं हड्डी बनती है ।
चन्द्र त्वचा ( चमं या खाल ). बनती है।
शनि गर्भ को रोम जमते हैं ।
बुघ च॑तन्यता भाती है हाथ पेर आदि हिछाने लगता है 1
` लग्नेश गभं संभव लग्नेश अग्न खाने की शक्ति देता है माता को खाई हुई वस्तु
का मसर उसपर होता है अंग हिलाता है ।
९ चंद्र चलने सरीखा हाथ पैर हिलाता है उदर के वाहर निकलने की योजना
करता है ।
११० सूर्य प्रसव ( जन्म ) होता हैँ।
गर्भे पीड़ा और वृद्ध
उपरोक्त प्रकार से आधान रग्न में पाप ग्रह यदि अरिष्ट कारक हो तो भी गभं
पीड़ा करता है 1 शुभ ग्रह शुभ ठिकाने हां ओर लग्न को शुभ दृष्टि से देखते हों तो गभं
बृद्धि हो ।
गर्भ को पोड़ा--कुंडलो में चंद्र जिस स्थान में पड़ा हो वहाँ से जिन-जिन स्थानों में
पाप ग्रह हों उन-उन महीनों में माता को पीड़ा होती है ।
शनि हो--फोड़ा फुन्सी, दस्त को बीमारी ।
मंगल--रुघिर विकार सिर ओर कमर में ददं ।
सूयं--बुखार और पेट में दर्द ।
राहु केतु--हट्टयों से इड़फूटन हाथ पैर में पीड़ा ।
प्रत्येक ग्रह प्रायः बमन का रोग उत्पन्न करता है । यदि शुभ युक्त या दृष्ट हो तो रोग नहीं करते यदि रोग हो भी तो साधारण होंगे ।
गर्भ पीड़ा समय--मास पति अस्तंगत हो ता उउ मने में पोड़ा देता ।
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