भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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निषेक अध्याय : २३१

मूल नक्षत्र का द्वादश गंड फल

सूल'नत्रक्ष की सवेघटी में १२ का भाग देने पर १ माग लगभग ५ घटी का पड़ेगा ।

१ भाग में जन्म पिता को अरिष्ट । २ में माता को अरिष्ट। ३ में भ्राता को

अरिष्ट 1 ४ में बहिन को अरिष्ट । ५ में स्वपुर को अरिष्ट । ६ में चाचा को अरिष्ट ।

७ में मौसी को अरिष्ट। ८ में सम्पत्ति को अरिष्ट । ९ में बालकोंो अरिष्ट । १० में

दरिद्रता | ११ में राज्य प्राप्ति । १२ वें भाग में सम्पत्ति प्राप्त ।

पुरुषाकार मूल और आदलेषा का फल

नक्षत्र के १० विभाग नीचे बताये प्रकार से शरीर के अंगों के हैं ।

मूल नक्षत्र आश्लेषा नक्षत्र शरोर अंग घटो फल

विभाग क्रम विभाग क्रम

१ पहिला श्०्वाँ सिर ५ छत्र लाभ

२ ९ मुख ५ पिता नाश

३ ८ दोनों कन्घे ८ भार वाहन कर्ता

Y ७ दोनों बांह ८ खोटे कमं करे

५ < दोनों हाथ २ हत्या करनेवाला

६ ष्‌ हृदय ८ राज्य प्राप्ति

७ x नाभि २ अल्पायु

८ ३ कपर १० अद्भुत सुख

९ २ जंघा ६ ` भ्रमण करे

१० qt १ पहिला पैरों में ६ अल्प जीवी

यहाँ आश्लेषा का विरुद्ध क्रम से बताया है: जैसे पहिला भाग ६ घटी का

वैरों में अल्पजीवी । दसवां भाग सिर में ५ घटी का फल छत्र लाभ | इस प्रकार

समझना । मूल का फल यहाँ बताये क्रमानुसार ही लेना । परन्तु मूल के विरुद्ध आश्लेषा

का फल यहाँ बताया है ।

बृक्षाकार मूल से फल विचार

१ जड़ ४ घटी-फल नाश । २ स्तंभ ७ घटी-घननाश । ३ त्वचा १० घटी-माई

को अरिष्ट । ४ शाखा ८ घटी-माता बो अरिष्ट। ५ पत्ते ९ घटो-परिवार को अशुभ ।

६ पुष्प ५ घटी-राज मैत्री । ७ फल ६ घटो-राउय प्राप्ति 1 ८ चोटी ११ घटी-अल्पायु ।

सूल के ३० मुहूतं

यहाँ x चिल्ल वाले नक्षत्र में बालक उत्पन्न हो तो परिवार का नाश करता है ।

ये क्रम से १, २, ६, ८, १८, २३ वें qgd हैं जिनमें परिवार का नाश होता हैं ।

इसमें आएलेषा के ३० मुहूतं के नाम दिये हैं । यहाँ भएलेषा को मूल के विरुद्ध

क्रम से इनकों गिनना चाहिये । Po ट