सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 246, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें२३० ¦ ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
( ३ ) रग्न गंडांत में जन्म हो तो पिता को अरिष्ट ।
तिथि गंडांत में जन्म हो तो ज्येष्ठ भ्राता को अरिष्ट ।
नक्षत्र गंडांत में जन्म हो तो स्वयं बालक को अरिष्ट ।
तीनों गंडांत में जन्म हो तो कुल का नाश करे ।
रेवती के गंडांत जन्म का फल
( १ ) रेवती के चतुर्थं चरण में दिन को जन्म हो तो पिता को अरिष्ट और चतुर्थ
चरण रात्रि में जन्म हो तो माता को अरिष्ट दोष ३ चरण अच्छे हूँ ।
रेवती प्रथम चरण में जन्म हो तो राजा हो, द्वितीय चरण में मंत्री हो । तृतीय
चरण के जन्म में सुख हो, चतुर्थ चरण में अनेक कष्ट हो ।
( २) आर्लेषा जन्म फल
१ चरण में सुख, सम्पति लाभ । २ चरण में-धन नाश । ३ चरण में माता को
अनिष्ट । ४ चरण में पिता को अनिष्ट ।
अन्यमत--दोनों संष्याओं में जन्म हो तो स्वयं को अरिष्ट कारक होता है.।
(३) ज्येष्ठा के जन्म का फल
१ चरण में बड़ा भाई। २ चरण में छोटा भाई बहन । ३ चरण में पिता या
माता को अरिष्ट । ४ चरण में स्वयं को अरिष्ट ।
अन्यमत--ज्येष्ठा ४ चरण में दिन के जन्म में पिता को अरिष्ट । ज्येष्ठा ४ चरण
छै रात में जम्म में माता को अरिष्ट ।
_ ज्येष्ठा की सर्व घटी में ६ का भाग देने से लगभग १० घटी का १ भाग होगा
उसका फल
१ भाग के जन्म में नानी को अरिष्ट । २ में नाना को अरिष्ट। ३ में मामा को
अरिष्ट । ४ में माता को अरिष्ट । ५ में बालक को अरिष्ट । ६ में कुल को अरिष्ट । ७
में मातु-पितु दोनों बंशों को । ८ में भ्राता । ९ में स्वसुर । १०ब भाग 4 सर्वनाश 1
ज्येष्ठा में कन्या हो और मंगलवार हो तो ज्येष्ठ भाई का नाश करे ।
(४) मूल नक्षत्र के जन्म का विचार
१ चरण में पुत्र जन्म हो तो पिता को अरिष्ट | कन्या का जन्म हो तो स्वपुर को
अरिष्ट । २ चरण में जन्म माता को अरिष्ट, कन्या जन्म हो तो सास को अरिष्ट। ३
रण में जन्म घन नाश । ४ चरण में जन्म हो वंश नाश ।
अन्यमत से--४ चरण में जन्म शुभ हो । जातक पारिजात और जातकाभरण मेँ.
चोथे चरण में जन्म-शुभ माना Š ।
मूल कहाँ है
फाल्गुन, ज्ये, वैशाल, अगहन में पावाऴ में वास शुम ह 1 आढ, भा दो
आरिविन, माघ में स्वग में वास शुभ है । श्रावण, कातिक, पुष, चेत्र में पृथ्बो में वास
` मृत्यु रूप हे ।