भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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निषेक अध्याय : २२९

जन्म तारा नाम

प्रथम नक्षत्र-आय । दशवां नक्षत्र-कमं । सोलहवां नक्षत्र-संघातिक । अठारहवां

नक्षत्र-समुदाय । उन्नोसवां नक्षत्र-आजान। तेइसवां नक्षत्र-वैनाशिक। पचीसवां

नक्षत्र-जाति देश अभिपेक ।

गंड काल में जन्म फल

जो बालक गंडान्त में उत्पन्न हो तो शान्ति उपचार आदि: करना चाहिये जिससे

बालक बच जावे तो बड़ा पराक्रमी और वाहन युक्त बड़ा ऐइवयेवान होता है क्योंकि

गंडांत में उत्पन्न बालक माता-पिता कुल व शरीर का नाश करता है जिसका विशेष

फल आगे बताया है।

मास के अनुसार गंडांत वास विचार और फल

वैशाख, श्रावण, माघ, फाल्गुन में>गंडांत स्वर्ग में वास-दोष नहीं 1

ज्येष्ठ, आषाढ, मार्गशीर्ष, पौष में>गंडांत मत्यंलोक में--मृत्यु ।

आश्विन, चैत्र, भाद्रपद, कात्तिक में=गंडांत पाताल मेँच्दोष नहीं ।

गंडांत में जन्म होने पर विचार

उस बालक को पिता ६ मास तक या २७ दिन तक न देखे । पश्चात्‌ फल (गंडांत)

-की शान्ति कराके मुख देखे ।

अश्लेपा का दोष ९ मास तक रहता है । मूल का दोष ८ वपं तक रहता है । ज्येष्ठा

का दोष १५३मास रहता है । अभुक्त मूल का दोष ८ वर्ष तक रहता है । कहा है-- पिता

बालक का मुख न देखे । शान्ति कराने के पश्चात्‌ इतने समय बाद मुख देखे ।

नवांश के अनुसार गंडांत विचार

मेष, सिंह; घन के पहले नवांश में, कक, वृश्चिक, मीन के अन्तिम नवांश में भी

गंडांत माना जाता ë । `

'गडकाल जन्मफल

( १)-गंडकाल की ४ घडियो में से बालक के जन्म का फळ ।

१ पहिली घटी में उत्पन्न हो तो माता मरे, २ दूसरी घटी में उत्पन्न हो तो पिता

मरे, ३ तोसरी घटी में उत्पन्न हो तो स्वयं को भयदायक, ४ चतुर्थ घटी में उत्पन्न हो

तो भाइयों को हानिकर हो ।

(२) तिथि या नक्षत्र गंड में उत्पन्न हो तो पिता-माता की मृत्यु ।

लग्न गंडांत में उत्पन्न हो तो स्वतः की मृत्यु Ll

जब जन्म में तीनों गंडांत हों तो वह तुरन्त मरे और कुटुम्ब का नाश करे ऐसा

बालक किसी प्रकार जी जावे तो नीच की सेवा करे और अनेक दुःख भोगे ।