सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 244, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें२२८ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
(१०) अन्यमत--मूल मघा अश्विनी का प्रथम चरण और रेवती ज्पेष्ठा अक्ळेवा
का चतुर्थ चरण में पिता को कष्ट ।
(११) घनिष्ठा १ चरण, हस्त १ चरण, विशाखा २ चरण, आर्द्रा २ चरण,
उ० भाद्रपद ३ चरण, इलेषा ३ चरण, भरणी ४ चरण, मूल ४ चरण ये बुरे हैँ?
, दिन में जन्म हो तो मृत्युदायक हूँ । रात में जन्म हो तो दोष दूर हो । `
(१२) इलेषा १ चरण, उत्तर भाद्र १ चरण, भरणी २ चरण, मूळ २ चरण,
उ० फाल्गुनी ३ चरण, श्रवण ३ चरण, स्वाती ४ चरण, मृग ४ चरण ये भी बुरे हैं ।
दिन में जन्म हो तो रोगदायक हूँ । रात में जन्म हो तो दोष न हों ।
(१३) विशाखा भरणी, पूर्वाभाद्रपद, मघा, आर्द्रा, कृतिका --इनके प्रत्येक चरण
में पहिलो ६ घटी के भोतर जन्म हो तो माता को कष्ट हा ।
(१४) वजगंड की ४ घटी में जन्म होने का दोष--
१ घटी का स्वामी रुद्र-पिता को अरिष्ट । २ घटी का स्वामो यम-माता को अरिष्ट ।
३ घटी का स्वामी अग्नि-घन हानि। ४ घटी का स्वामी मृत्यु-शिशु को अरिष्टकारक
Ë 1 इनके स्वामी का पूजन कर शान्ति करे ।
(१५) गंडयोग में यात्रा करे तो चोरों का डर हो । गंडयोग में विवाह करे पो
मृत्यु हो ।
(१६) जिस गंडयोग में पापग्रहों का योग हो-जन्म महा दोषकारी हूँ 1
शिस गंडयोग में शुभग्रहों का योग हो-थोड़। शुभ करनेवाझा होता है ।
(१७) रात्रि में नक्षत्र के अन्त में अशुभ । दिन में नक्षत्र के आदि में अशुभ ।
(१८) कन्या जन्मफल-मूल में | श्लेषा में विशाखा में । ज्येष्ठा में
स्वसुर का मरण | बुरे आचरण | देवर का मरण | ज्येप्ठ मरे
(१९) ज्वालामुखी योग
नक्षत्र | मूळ | भरणी | कृतिका | रोहिणी , आइलेपा FRR > | १०
कहा है इनमें जन्म हो तो नहीं जोये । इसे भी कई लाग मूळ मानते हैं. इसको भी
शान्ति करानो चाहिये ।
(२०) जन्मतारा का पापग्रह से वेध
हो तो तुरन्त मृत्यु होती है । शुभग्रह से
वेध हो तो जन्म तारा ( नक्षत्र) आदि
शुमफल देते हे । इस वेघ का विचार सप्त
शलाका चक्र से करना चाहिए । अ उनिउचदष मू-ज्थङ्् ?
यहाँ बताये नक्षत्रो के सम्मुख नक्षत्र में कोई ग्रह हो तो उसका वेघ होता ¿lt