भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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निषेक अध्याय : २२७

इन उपरोक्त संधियों में शुभ काम वर्जित है इनमें जन्मे को दुष्ट योग होते हैं ।

(४) कृष्णपक्ष की चतुदंशो के जन्म का विचार

तिथि के ६ भाग करो (१) भाग-शुभ, (२) भाग-पिता का नाश, (३) भाग-माता

का नाश, (४) भाग-मामा का नाश, (५) भाग-भाई का नाश या वंश का नाश, (६)

भाग-स्वयं जातक का नाश या धन हानि।

(५) अन्यगंड--(१) पूर्वाषाढा नक्षत्र में घनु लग्न हो या पुष्य नक्षत्र में कर्क लग्न

हो तो पिता का नाश ।

(२) पूर्वाषाढ़ा मोर पुष्य नक्षत्र में-१ चरण में जन्म हो तो पिता को, दूसरे चरण

में माता को, तीसरे चरण के बालक को, चौथे चरण में माता को क्लेश या हानि ।

(३) उत्तरा फाल्गुनी के प्रथम चरण में, पुष्य नक्षत्र के. मध्य के दोनों चरणों में,

"चित्रा नक्षत्र के तीसरे चरण में, भरणी नक्षत्र के पूर्वाद्ध में, हस्त नक्षत्र के तीसरे चरण

में रेवतो नक्षत्र के चोथे चरण में पुत्र हो तो--पिता को अनिष्ट, कन्या हो तो-माता

को अनिष्ट ।

(४) पिता के नक्षत्र में उत्पन्न पुत्र--पिता को अनिष्ट करता है ५

, माता के नक्षत्र. में उत्पन्न कन्या--भाता को अनिष्ट करती हू ।

(५) अन्यमत-पूर्वाषाड़ा में धनु लग्न, पुष्य में ककं लग्न, चित्रा में कन्या लग्न में

उत्पन्न हो तो माता, पिता, जातक और मामा को अरिष्ट करेगा चाहे लग्न ओर चन्द्र

पर शुभ दृष्टि हो।

(६) अन्यमत---हस्त और. मघा के तीसरे चरण में उत्पन्न--माता-पिता या

काका को अरिष्ट करता है । पूर्वापाढ़ा और पुष्य के प्रथम चरण में उत्पन्न--पिता को

अरिष्ट, चित्रा, विशाखा और हस्त में उत्पन्न--माता को अरिष्ट, मृगशिर के बीच में

उत्पन्न--माता को अरिष्ट करता ë ।

(७) कुल संहारक योग--तिथि ३-६-१० ओर शुक्ल १४ को शनिवार या मंगल

हो इसमें जन्म हो तो कुळ संहारक होता है 1

(८) अन्य कुळनाशक योग--दिन क्षय, व्यतीपात, व्याघात, वैधृति, झुल, गंड,

अतिगड, वस्त्र योग, विष्टि (भद्रा) करण, परिघ, यमघंट, कालदंड, मृत्यु, दग्धयोग,

क्षय ति.थ, संक्रान्ति, कृष्ण पक्ष की चतुर्दशो, अमावास्या और गंडान्त में जन्म होने सै

बड़ा दोग होआ है । सहोदर भाई बहिन के नक्षत्र में या पिता के नक्षत्र में भो जन्म शुभ

नहीं होता ।

कहा है कि भाई बहनों का पिता पुत्रों . का एक ही नक्षत्र में जन्म हो तो जिसका

जन्म पहले हुआ हो उस संतान का नाश होता हे या पिता को, भ्राता को रोग हो या

पिता या ज्येष्ठ भ्राता का नाश हो ।

(९) अश्विनों मघा मूल जन्म में इनका पूर्वाद्ध-पिता को कष्ट ।

रेवती ज्येष्ठा जन्म में इनका उत्तरार्द--माता को कष्ट 1,