भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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निषेक अध्याय : २३३

“७ भाग मामा को अरिष्ट, ८ भाग चाची को अरिष्ट, ९ भाग सर्वनाश, १० भाग पशु

का नाश, ११ भाग नौकर का नाश, १२:भाग जातक का नाश, १३ भाग ज्येष्ठ भाई

को अरिष्ट, १४ भाग बहि। को अरिष्ट, १५ भाग नाना को अरिष्ट ।

जैसे--मुल का भभोग ६२-१५ है+ १५= १ खंड ४-९, घटी. का पड़ा इसका

आठवां खंड ३३-१२ तक है । ९वां खंड ३७-२१ तक है मान लो इष्ट ३६-११ है तो

९वें खंड में जन्म हुआ जिसका फल सर्वनाश है ।

(५) मघा में जन्म फल

१ चरण जन्म मामा का नाश V ३ चरण में जन्म सुख सम्पत्त ।

२ चरण में जन्म पिता । ४ चरण में जन्म घन लाभ सम फल ।

पिता का नाशक गंडयांग

अश्विनी के पहले चरण में--१६ वर्ष में गंड दोप होता है पिता को अनिष्ट 1

मघा के पहले चरण में--८ वर्ष में गंड दोष होता है पिता को अनिष्ट 1

ज्येष्टा के पहले चरण में--१ वर्ष में गंड दोष होता है पिता को अनिष्ट ।

चित्रा के पहले चरण में--५ वर्ष में गंड दोप होता है पिता को अनिष्ट ।

मूल के पहले चरण मॅ--४ वर्ष में गंड दोष होता है पिता को अनिष्ट ।

आए्लेषा के पहले चरण में--२ वर्ष में गंड दोष होता है पिता को अनिष्ट ।

रेवती के पहले चरण में--१ वर्ष में गंड दोष होता है पिता को अनिष्ट ।

-उत्तरा के पहले चरण में--२ मास में गंड दोष होता है पिता को अनिष्ट ।

“पुष्य कें पहले चरण में--३ मास में गंड दोष होता हैं पिता को अनिष्ट 1

यूर्वाषाढा के पहले चरण में--९ मास में गंढ दोष होता है पिता को अनिष्ट 1

(हस्त के गंड में उत्पन्न--१२ वर्ष में पिता का संहार करे ।

अमुक्त मुल में उत्पन्न--उसो क्षणं पिता का नाश करे ।

इतर जन्म के अशुभ योग

(१) पिता के जन्म नक्षत्र या १०वें नक्षत्र में उत्पन्न बालक पिता का नाझ

करता है । (२) पिता की जन्मराशि के नवांश में तथा उसके लात में बालक पिता का

तुरन्त नाश करता है। (३) मुसल “और मुद्गर योग में उत्पन्न-"शुभ नाशक 1 (४) भद्रा

में उत्पन्न-दरिद्र-। (५) गुलिक में उत्पन्न--अंगहीन । (६) रिक्ता तिथि में उत्पत्त--

नपुंसक । (७) यमघंट में उत्पन्न--लंगड़ा । (८) ग्रह पीडित में उत्पन्न--रोगपीडित ।

(९) व्यतोपात में उत्पन्न--अंगहोनः । (१०) परिधि योग में उत्पन्न--मृत्यु ।

(११) वैधूति योग में उत्पन्न--पिता “का नाशक ।. (१२) विष्कुंभ में उत्पन्‍्त--घन

नाश । (१३) शूल में उत्पन्न-शूल रोगो | (१४) गंड में उत्पन्न--गंड रोग ।

(६) अन्यत्री फल ` i °

(१) चरण--पिता को भय । (३) चरण--मंत्री पद ।

(२) चरण--सुख ऐदवयं । (४) चरण--राज सम्मान ।