सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 250, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें२३४ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
पर्वाषाढा के जन्म फल
कई ने इसका जन्म भो अशुभ बताया है मूल के आगे यह नक्षत्र है 1
(१) चरण--पिता को अरिष्ट । (३) चरण--मामा को अरिष्ट ।
(२) चरण--माता को अरिष्ट । (४) चरण--बालक का अंग ।
अमावस्या जन्म फल
अमावस्या के दिन जन्म स्त्री, पशु, हाथी, घोड़ा, भैस के बच्चा हो लक्ष्मी का
नाश करता है ।
चतुर्दशी मिली अमावस्या (सिनीवाली) में एवं प्रतिपदा मिली अमावस्या (कुहू) में
उत्पन्न बालक को त्याग देना बताया है । बहुत अशुभ है इसकी शांति विघानपुवंक
करानी चाहिये ।
ग्रहण में जन्म
राहु केतु द्वारा चन्द्रग्रहण में चंद्र का घेरा बन जावे और उसे कोई पापग्रह देखे
तो बालक तुरन्त मरे । ग्रहण के समय जो बालक होता है वह कम जीता है । यदि जिये
तो बड़ा आदमी होता है 1
दाँत विचार
१-दांत सहित बालक उत्पत्न--कुळ का नाशक हो। २-दूसरे मास से ४ मास
तक दांत होवे--पिता को अरिष्ट । ३-६ठे मास में दांत होवे-शिशु को अरिष्ट । ४-७.
: मास में दांत होवे--शुभ होता है।
| गंडयांति विधि
अरिष्ट चंदन कुष्ट गोरोचन इनको घी में मिळाकर ४ कल्शों में भरे फिर पंडित
“सुहस्नशीर्षा” ” इस मंत्र से यदि दिन में बालक उत्पन्न हुआ हो तो पिता सहित,
यदि रात्रि में हुआ हो तो माता सहित यदि दोनों संध्या में उत्पन्न हो तो माता-पिता
i सहित स्नान करावे । और गंड की शांति के लिये घी से पुणं कांसे का बत॑न देवे ग्रह का
ज्ञप भी करावे, यथाशक्ति काळी गाय सुवणं आदि दान देवे ।
अन्यमत--नवरत्न १०० औषधियों की जड़ सप्तमृत्तिका से पणं .करे और १००
छेदवाले घड़े में से निकाले हुऐ जल से उत्पन्न वालक और माता-पिता को स्नान करावे ।
ब्राह्मणों के कहे हुए मंत्र से जप-होम-दान से शांति कराने से मंगळ होता है ।
सर्वे अरिष्ट निवारण के लिए इस प्रकार ब्राह्मणों का दान देना । |
नक्षत्र हस्त अ्बिनी रेवती ज्येष्ठा मघा मूल उत्तरा. पुष्य पूषा चित्रा इलेषा
वस्तु-_ स्वर्ण वस्त्रदान धुत गौ स्वर्ण महिष तिल घेनु सुवर्ण वस्त्र अश्व
i ॥ 1 i
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